12 फरवरी को ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर उज्जैन में भी देखने को मिला। शहर के टावर चौक पर सीटू के बैनर तले कर्मचारियों ने एकत्र होकर केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने रैली निकालते हुए नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन में एलआईसी, आयकर विभाग, बीएसएनएल, एमआर यूनियन, संयुक्त ट्रेड यूनियन और आंगनवाड़ी कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाते हुए श्रम नीतियों और सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराया। हालांकि भारतीय मजदूर संघ इस हड़ताल में शामिल नहीं हुआ।
उज्जैन में दिखा असर
ट्रेड यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि हड़ताल का निर्णय केंद्र सरकार की कथित मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और सार्वजनिक क्षेत्र के खिलाफ नीतियों के विरोध में लिया गया है। उनका आरोप है कि नई श्रम संहिता से कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और इससे श्रमिकों की सुरक्षा कमजोर पड़ सकती है।
एलआईसी की अधिकारी दीपिका सक्सेना ने बताया कि श्रम संहिता में महिलाओं के कार्य घंटों को 8 से बढ़ाकर 12 किए जाने का प्रावधान चिंताजनक है। उन्होंने मांग की कि कार्य घंटे कम किए जाएं। साथ ही रात की पाली में महिलाओं को काम करने की अनुमति पर सुरक्षा के मद्देनजर पुनर्विचार किया जाए। कर्मचारियों ने एलआईसी में नई भर्तियों की मांग और एफडीआई का विरोध भी किया।
समझौतों पर आपत्ति
प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के निजीकरण, बीएसएनएल, बैंक और बीमा जैसे सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने के प्रस्तावों का विरोध किया। साथ ही भारत-अमेरिका किसान समझौते पर भी आपत्ति जताई। कर्मचारियों का कहना है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे भी आंदोलन जारी रहेगा।
