शिव नवरात्रि के षष्ठम दिवस पर महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल का विशेष होलकर स्वरूप में श्रृंगार किया गया। मंदिर प्रांगण स्थित कोटितीर्थ के तट पर सुबह ही श्री कोटेश्वर महादेव का पूजन-अभिषेक और आरती संपन्न हुई। इस दौरान भक्तों ने मंदिर में पहुंचकर दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों ने रुद्रपाठ के साथ भगवान महाकाल का अभिषेक किया। भक्तों ने श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया। दोपहर 3 बजे के बाद संध्या पूजन भी आयोजित किया गया, जिसमें विशेष मंत्रोच्चारण और दीपाराधना की गई।
महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि
संध्या पूजन के बाद भगवान महाकालेश्वर को रजत मुकुट चंद्र और नवीन वस्त्रों के साथ मुण्डमाल अर्पित कर श्रृंगारित किया गया। इस विशेष श्रृंगार में भक्तों ने उत्साहपूर्वक भगवान के दर्शन किए और होलकर स्वरूप की भव्य झलक देखी।
भगवान महाकालेश्वर के शिव नवरात्रि श्रृंगार के क्रम में प्रतिदिन संध्या समय अलग-अलग रूपों में दर्शन होंगे। 12 फरवरी को भगवान मनमहेश स्वरूप में, 13 फरवरी को उमा महेश स्वरूप में, 14 फरवरी को शिव तांडव श्रृंगार स्वरूप में और 15 फरवरी को सप्तधान मुखौटा अर्पित कर दर्शन देंगे। भक्तों के लिए यह अवसर आस्था और भक्ति से परिपूर्ण रहेगा।
भक्तों में उत्साह और आस्था
भक्तों ने मंदिर में पहुंचकर दर्शन और आरती में भाग लिया। खासकर होलकर स्वरूप के दर्शन ने श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह पैदा किया। मंदिर प्रशासन ने भी सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं, ताकि भक्त आसानी से पूजा-अर्चना में शामिल हो सकें। महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि के दौरान भगवान के विभिन्न रूपों में श्रृंगार का आयोजन भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है।
