उज्जैन में मंदिरों के विकास के बाद अब शिप्रा नदी के रामघाट का कायाकल्प करने की तैयारी तेजी से चल रही है। सिंहस्थ कुंभ से पहले रामघाट पर होने वाली शिप्रा आरती को वाराणसी की गंगा आरती की तर्ज पर भव्य, अनुशासित और सुव्यवस्थित रूप देने के लिए जिला प्रशासन ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है।
अधिकारियों का कहना है कि उज्जैन में धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ रहा है। रोजाना रामघाट पर होने वाली शिप्रा आरती को वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत शिप्रा नदी की महिमा को पुनर्स्थापित किया जाएगा और आरती स्थल पर स्वच्छता, सुरक्षा तथा श्रद्धालुओं के सुचारु प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे।
उज्जैन के रामघाट का होगा कायाकल्प
रामघाट पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए घाट की साज-सज्जा और संरचना को बेहतर बनाया जाएगा। घाट पर नए पत्थर लगाए जाएंगे और मार्गों को सुरक्षित एवं व्यवस्थित किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ में देश-विदेश से आने वाले करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए वातावरण और सुविधाएं पूरी तरह तैयार हों।
रामघाट पर शिप्रा आरती के दौरान लाइटिंग, मंच, वेशभूषा और अन्य व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसका उद्देश्य आरती को और अधिक भव्य और आकर्षक बनाना है। प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि आरती स्थल पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुखद अनुभव प्राप्त हो।
सिंहस्थ कुंभ तक पूर्ण होने की योजना
जिला प्रशासन ने कहा कि रामघाट के विकास और शिप्रा आरती से जुड़े सभी कार्य सिंहस्थ कुंभ से पहले पूरे कर लिए जाएंगे। इसमें घाट की सुरक्षा, साफ-सफाई, मार्गों की व्यवस्था और आध्यात्मिक वातावरण पर विशेष बल दिया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि आरती और घाट का अनुभव श्रद्धालुओं के लिए यादगार और अनुशासित हो।
रामघाट का कायाकल्प उज्जैन को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक नई पहचान देगा। शिप्रा आरती को भव्य और व्यवस्थित बनाने से ना केवल स्थानीय श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
