बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, लेकिन महागठबंधन के दो बड़े दल RJD और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही। पहले चरण का नामांकन खत्म हो चुका है, जबकि दूसरे चरण के लिए बस दो दिन बाकी हैं। ऐसे में दोनों दलों के बीच समन्वय बनने की बजाय मामला और बिगड़ता नजर आ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और तेजस्वी यादव के बीच बातचीत लगभग ठप हो गई है। जो बातचीत कुछ दिन पहले तक चल रही थी, अब वहीं से रुक गई है। इसका नतीजा ये हुआ कि दोनों दलों के बीच अविश्वास और नाराज़गी बढ़ गई है।
उधर, RJD ने कांग्रेस पर दबाव बनाने के लिए अब लेफ्ट दलों से हाथ मिला लिया है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस की जिन 10 सीटों पर दावेदारी थी, वहां अब RJD या लेफ्ट की पार्टियों ने अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए हैं। इससे कांग्रेस खेमे में और बेचैनी बढ़ गई है।
वजह नंबर 1
मामले की जड़ सीटों का बंटवारा है। RJD चाहती है कि कांग्रेस को पिछली बार की तुलना में कम सीटें दी जाएं। तेजस्वी यादव इस बार कांग्रेस की करीब 15-20 सीटें घटाना चाहते हैं। उनका तर्क है कि पिछली बार कांग्रेस ने 70 सीटों पर लड़कर सिर्फ 19 जीती थीं यानी स्ट्राइक रेट बहुत खराब रहा था। वहीं, कांग्रेस ने साफ कह दिया कि सीटें घटेंगी तो अनुपात में दोनों की घटेंगी। कांग्रेस का रुख है कि वह किसी भी हाल में 61 से 65 सीटों पर लड़ेगी। इस बात पर तेजस्वी और अल्लावरू के बीच टकराव साफ दिखाई दे रहा है।
वजह नंबर 2
पटना में सीटों को लेकर सात बैठकें हुईं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद, तेजस्वी सीधे दिल्ली पहुंच गए और राहुल गांधी से मुलाकात की कोशिश की। वे चाहते थे कि राहुल से सीधे बातचीत कर सीटों का फैसला कर लिया जाए, लेकिन राहुल ने साफ कहा कि पहले बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ बैठकर बात करें, उसके बाद ही आगे बढ़ा जा सकता है। तेजस्वी को यह बात पसंद नहीं आई और वे बिना किसी निष्कर्ष के वापस पटना लौट आए। इसके बाद से लालू परिवार कांग्रेस के रवैये से खफा बताया जा रहा है।
वजह नंबर 3
कांग्रेस के प्रदेश नेताओं के मुताबिक, तेजस्वी यादव कांग्रेस की कुछ मजबूत सीटों पर भी नजर गड़ाए बैठे हैं। इनमें महाराजगंज और कुटुंबा जैसी सीटें शामिल हैं, जो पहले कांग्रेस के पास थीं। तेजस्वी चाहते थे कि इन सीटों को वे अपने या सहयोगी उम्मीदवारों को दे सकें। इसके अलावा, उन्होंने वैशाली की लालगंज सीट पर बाहुबली मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला और वारसिलीगंज पर अशोक महतो की पत्नी अनीता देवी को टिकट देने की बात कही थी। कांग्रेस ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया, जिसके बाद अब दोनों दल इन सीटों पर अपने-अपने प्रत्याशी उतार रहे हैं।
‘ईगो क्लैश तक पहुंचा मामला
अब लड़ाई सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि ‘इज़्ज़त’ की हो गई है। दोनों नेताओं के बीच ईगो क्लैश खुलकर सामने आ गया है। तेजस्वी चाहते हैं कि महागठबंधन की ओर से उन्हें मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया जाए, लेकिन कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं। अल्लावरू का कहना है कि सीएम का फैसला चुनाव के बाद होगा, पहले गठबंधन बचा रहे ये ज़्यादा ज़रूरी है।
