दिल्ली में बढ़ा कैंसर का खतरा, चपेट में आए युवा और बच्चे; वायु प्रदूषण बना कारण

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Published On: 31 January 2026

दिल्ली से एक चिंताजनक स्वास्थ्य रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि कैंसर अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। दिल्ली सरकार के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 20 वर्षों में कैंसर से मरने वाले हर तीसरे व्यक्ति की उम्र 44 साल से कम थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कामकाजी युवा आबादी इस जानलेवा बीमारी की तेजी से चपेट में आ रही है।

देश की राजधानी दिल्ली में कैंसर अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। दिल्ली सरकार के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में दिल्ली में कैंसर से होने वाली मौतों में हर तीसरा शख्स युवा या मध्य आयु वर्ग का है, जो इस बीमारी की गंभीरता और तेजी से बढ़ते खतरे को दर्शाता है।

दिल्ली में बढ़ा कैंसर का खतरा

दिल्ली में कैंसर का खतरा अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि युवाओं और बच्चों में भी इसका ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। पिछले 20 साल में 14 साल से कम उम्र के करीब 7,298 बच्चों की कैंसर से मौत हुई, जो कुल मौतों का लगभग 8% है। वहीं 15 से 24 साल की आयु वर्ग में 5,415 युवाओं की जान जा चुकी है। सबसे अधिक प्रभावित 45 से 64 वर्ष के लोग रहे, जिनकी हिस्सेदारी कुल मौतों में 41% रही। जेंडर के हिसाब से देखें तो पुरुषों में मौतें महिलाओं की तुलना में अधिक रही; पुरुषों में मुख्य घातक कैंसर रेस्पिरेटरी (फेफड़े), प्रोस्टेट और ओरल (तंबाकू) कैंसर हैं, जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर, ओवेरियन और सर्वाइकल कैंसर सबसे अधिक घातक पाए गए हैं।

वायु प्रदूषण बना कारण

दिल्ली एम्स के डॉ. अभिषेक शंकर के अनुसार, राजधानी में कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे मुख्य कारण वायु प्रदूषण और इलाज में असमानता हैं। दिल्ली की जहरीली हवा न केवल फेफड़ों बल्कि ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को भी बढ़ा रही है। वहीं, प्राइवेट अस्पताल महंगे होने के कारण और सरकारी अस्पतालों में मरीजों के भारी दबाव के कारण कई बार रोगियों को सही समय पर कीमोथेरेपी या रेडिएशन नहीं मिल पाता। खासतौर पर युवाओं में कैंसर न केवल तेजी से बढ़ रहा है, बल्कि यह अधिक आक्रामक (एग्रेसिव) स्वरूप ले रहा है।

मौत के आंकड़ों ने बढ़ाई धड़कनें

दिल्ली में पिछले 20 वर्षों में कैंसर से मौतों का आंकड़ा चिंताजनक रूप से बढ़ा है। 2005 में लगभग 2,000 लोग कैंसर के कारण मौत के मुंह में गए, जो 2024 तक बढ़कर 7,400 हो गया। कुल मिलाकर बीते दो दशकों में 1.1 लाख लोग इस बीमारी से जान गंवा चुके हैं। कैंसर से होने वाली मौतों की दर 7% है, जो दिल्ली की जनसंख्या वृद्धि दर से तीन गुना अधिक है। इनमें से लगभग 93,000 मौतें अस्पतालों में दर्ज की गईं, जो यह दिखाती हैं कि लोग इलाज के लिए पूरी तरह अस्पतालों पर निर्भर हैं।

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