रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नए राफेल विमानों के सौदे को दी मंजूरी, वायुसेना की बढ़ी ताकत

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Published On: 12 February 2026

भारतीय वायुसेना की ताकत अब पहले से और बढ़ने वाली है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की बैठक में नए राफेल फाइटर जेट्स की खरीद को मंजूरी दे दी गई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत अपनी हवाई सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वायुसेना के स्क्वाड्रन की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की बैठक में भारत ने नए राफेल फाइटर जेट्स की खरीद को मंजूरी दे दी है, जिससे भारतीय वायुसेना की ताकत पहले से और बढ़ जाएगी।

रक्षा मंत्री ने नए विमानों को दी मंजूरी

रक्षा क्षेत्र में भारत के लिए बड़ी खबर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नए राफेल विमानों के सौदे को मंजूरी दे दी है, जिससे भारतीय वायुसेना की ताकत और भी बढ़ने वाली है। इस नए सौदे के बाद भारत के आसमान में उसकी शक्ति और दबदबा बढ़ेगा, और यह कदम देश की सुरक्षा और सामरिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

वायुसेना की बढ़ेगी ताकत

भारतीय वायुसेना अपनी ताकत बढ़ाने के लिए लगातार आधुनिक युद्ध क्षमताओं को मजबूत कर रही है। नए राफेल जेट्स के शामिल होने से न केवल वायुसेना के बेड़े की शक्ति बढ़ेगी, बल्कि यह पड़ोसी देशों की चुनौतियों के बीच भारत की युद्ध की तैयारी यानी Operational Readiness को भी और मजबूत करेगा।

भारत को फ्रांस से रक्षा डील की मिली मंजूरी

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के संभावित भारत दौरे से ठीक पहले भारत ने एक महत्वपूर्ण रक्षा डील को मंजूरी दे दी है, जिसे रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। इस डील से भारत और फ्रांस के बीच इंजन निर्माण, एवियोनिक्स और वेपन इंटीग्रेशन जैसी उन्नत तकनीकों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, बैठक में हाई-एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (HAPS) जैसी क्षमताओं को भी मंजूरी दी गई है, जिससे सीमा पर निगरानी और नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध कौशल में भारत को महत्वपूर्ण बढ़त मिलेगी।

आत्मनिर्भर भारत को मिली मजबूती

हाल ही में हुए इस सौदे में सिर्फ खरीद तक सीमित नहीं रहकर ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसमें ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी उत्पादन, MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल) सुविधाओं के विकास और उच्च तकनीक के हस्तांतरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके माध्यम से भारत रक्षा क्षेत्र में वैश्विक हब बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है।

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