केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान और उसकी प्रस्तुति में एकरूपता बनाए रखने के उद्देश्य से नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार अब सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ का संक्षिप्त नहीं, बल्कि छह छंदों वाला पूरा संस्करण ही प्रस्तुत किया जाएगा, जिसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है। यह फैसला राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर लिया गया है, ताकि इसके गौरव, महत्व और राष्ट्रीय भावना को और अधिक सशक्त रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
भारत सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक अहम बदलाव किया है। नए निर्देशों के अनुसार अब आधिकारिक समारोहों और उत्सवों में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा छह छंदों वाला संस्करण ही प्रस्तुत किया जाएगा।
राष्ट्रगान से पहले अब गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’
सरकार ने राष्ट्रीय प्रोटोकॉल को लेकर स्पष्ट किया है कि यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों का आयोजन किया जाना है, तो कार्यक्रम की शुरुआत पहले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ से होगी और इसके बाद ‘जन गण मन’ का गायन किया जाएगा। जैसे ही ‘वंदे मातरम्’ गाया जाए, वहां उपस्थित सभी लोगों को सम्मान स्वरूप सावधान की मुद्रा में खड़े होना अनिवार्य होगा। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि फिल्मों या डॉक्यूमेंट्री के दौरान यदि राष्ट्रीय गीत का प्रसारण किया जाता है, तो दर्शकों के लिए खड़े होना जरूरी नहीं होगा, ताकि दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति में कोई बाधा न आए।
सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ हुआ अनिवार्य
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति को लेकर सरकारी कार्यक्रमों में अहम बदलाव किया है। नए निर्देशों के अनुसार अब आधिकारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ का संक्षिप्त नहीं, बल्कि पूरे छह छंदों वाला संस्करण ही प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके लिए 3 मिनट 10 सेकंड का समय तय किया गया है। यह फैसला राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर उसकी गरिमा और एकरूपता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों हों, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद ‘जन गण मन’ होगा। गीत शुरू होने पर सभी उपस्थित लोगों को सावधान मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा।
तीन श्रेणियों में बांटे गए सरकारी कार्यक्रम
- गृह मंत्रालय ने सरकारी कार्यक्रमों को उनकी प्रकृति और महत्ता के आधार पर तीन श्रेणियों में विभाजित किया है।
- प्रथम श्रेणी में वे आयोजन रखे गए हैं, जिनमें केवल राष्ट्रगान की धुन बजाई जाएगी, जैसे राष्ट्रपति का संबोधन या राजकीय सम्मान से जुड़े कार्यक्रम।
- द्वितीय श्रेणी में ऐसे कार्यक्रम शामिल हैं, जहां राष्ट्रगान की धुन के साथ सामूहिक गायन भी किया जाएगा, जैसे सांस्कृतिक उत्सव या परेड के अलावा अन्य औपचारिक समारोह।
- तृतीय श्रेणी में उन आयोजनों को रखा गया है, जहां राष्ट्रगान का गायन स्वैच्छिक होगा, जैसे स्कूलों की सुबह की सभा या इसी तरह के कार्यक्रम।
शिक्षण संस्थानों को मिली विशेष सलाह
शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षण संस्थानों के लिए एक विशेष सलाह जारी की है, जिसमें स्कूलों को अपने दिन की शुरुआत सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ के गायन से करने का सुझाव दिया गया है। मंत्रालय का कहना है कि इससे विद्यार्थियों के मन में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को और मजबूत किया जा सकेगा। अब तक राष्ट्रीय गीत के गायन को लेकर न तो कोई तय समय सीमा थी और न ही कोई आधिकारिक तरीका निर्धारित था, लेकिन मंत्रालय द्वारा जारी 10 पन्नों के इस आदेश ने इन सभी अस्पष्टताओं को स्पष्ट कर दिया है।
