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भोपाल में मैदान अधिग्रहण को लेकर विरोध तेज, मंत्री के बंगले पहुंचे लोग

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Published On: 7 July 2025

भोपाल | बरखेड़ा एफ सेक्टर स्थित बाबूलाल गौर खेल एवं दशहरा मैदान के अधिग्रहण के विरोध में सोमवार को क्षेत्र के दर्जनों लोग नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री कृष्णा गौर के श्यामला हिल्स स्थित सरकारी आवास पहुंचे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भेल ने दशकों पुराने इस सार्वजनिक मैदान को बाउंड्रीवॉल बनाकर लीज पर दे दिया है, जबकि यह मैदान क्षेत्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का केंद्र रहा है।

‘लोगों ने संवारकर बनाया मैदान, अब छीना जा रहा है’

भेल युवा संगम समिति के बैनर तले पहुंचे रहवासियों ने मंत्री गौर को बताया कि यह मैदान पहले पूरी तरह उबड़-खाबड़ था। इलाके के युवाओं और समाजसेवियों ने मिलकर इसमें 300 से 400 ट्रक मिट्टी डलवाई और मैदान को समतल कराया। पिछले करीब 10 वर्षों से यहां दशहरा उत्सव, रामलीला, झूले, गणेशोत्सव जैसे कार्यक्रमों के साथ ही क्रिकेट, कबड्डी, वालीबॉल जैसे खेलों के टूर्नामेंट आयोजित होते रहे हैं।

पूर्व पार्षद केवल मिश्रा ने कहा कि यह मैदान केवल एक खाली ज़मीन नहीं, बल्कि क्षेत्र की पहचान और सार्वजनिक उपयोग की संपत्ति है। भेल प्रबंधन द्वारा इसे बाउंड्रीवॉल बनाकर किसी निजी संस्था को लीज पर देना जनभावनाओं के खिलाफ है।

मंत्री गौर ने दिया आश्वासन

मंत्री कृष्णा गौर ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनी और उन्हें आश्वस्त किया कि वे इस मुद्दे पर भेल प्रबंधन से चर्चा करेंगी। उन्होंने कहा कि रहवासियों की भावनाओं और जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। इस दौरान समिति के सदस्यों ने ज्ञापन भी सौंपा।

पुलिस रही सतर्क

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया। मंत्री के बंगले के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया, ताकि किसी भी संभावित हंगामे को रोका जा सके। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और कोई अप्रिय स्थिति नहीं बनी।

रहवासियों ने दी चेतावनी

रहवासियों ने चेतावनी दी कि यदि इस मैदान का अधिग्रहण रद्द नहीं किया गया और सार्वजनिक उपयोग के लिए इसे संरक्षित नहीं किया गया, तो वे आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन करेंगे। समिति के सदस्यों ने कहा कि यह केवल खेल का मैदान नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र है, जिसे किसी भी हालत में निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा।

फिलहाल, भेल प्रबंधन की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन लगातार हो रहे विरोध से यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मंत्री गौर द्वारा हस्तक्षेप के बाद अब नजरें भेल की अगली कार्रवाई पर टिक गई हैं।

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