भोपाल | साल 2020 के बाद से पूरी दुनिया ने महसूस किया कि एक छोटा-सा वायरस जिंदगी को कैसे ठप कर सकता है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। पहले कोरोना, फिर मंकीपॉक्स जैसी बीमारियों ने हेल्थ सिस्टम को झकझोर कर रख दिया। सबसे बड़ी बात ये रही कि ज़्यादातर संक्रमण विदेश से लौटे यात्रियों के ज़रिए ही देश में दाखिल हुए। अब इन्हीं अनुभवों से सबक लेते हुए केंद्र सरकार एक नया हाईटेक कदम उठा रही है।
भोपाल और इंदौर के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर जल्द ही थर्मल स्कैनर लगाए जाएंगे। ये स्कैनर यात्रियों के शरीर का तापमान छूए बिना नापेंगे और बुखार वाले व्यक्ति को तुरंत पहचान लेंगे।
हेल्थ इमरजेंसी से पहले अलर्ट
यह योजना डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) के तहत लाई जा रही है, जो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है। DGHS ने थर्मल स्कैनर सप्लाई करने के लिए इच्छुक कंपनियों से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) मंगवाए थे, जिससे बीमारी फैलने से पहले ही संदिग्ध लोगों की पहचान और समय रहते रोकथाम। इन स्कैनर्स को न सिर्फ एयरपोर्ट पर, बल्कि सी-पोर्ट और लैंड बॉर्डर जैसे इंटरनेशनल एंट्री पॉइंट्स पर भी लगाने की योजना है, ताकि विदेश से आने वाला कोई भी यात्री यदि बीमार है, तो उसकी पहचान तुरंत हो जाए।
हाईटेक स्कैनर की होगी तैनाती
ये थर्मल स्कैनर इंफ्रारेड तकनीक पर आधारित होंगे। मतलब, मशीन सामने से गुजरते किसी भी व्यक्ति का तापमान सेकेंडों में बिना छुए माप लेगी। भीड़भाड़ के वक्त भी यात्रियों को रोके बिना स्क्रीनिंग की जा सकेगी। और अगर किसी को तेज बुखार होगा तो स्कैनर खुद अलर्ट देगा।
होंगे इतने फीचर्स
- थर्मल सेंस्टिविटी 50mK से कम होनी चाहिए
- हाई रेजोल्यूशन इमेज
- फेस रिकग्निशन तकनीक
- अलर्ट सिस्टम और डेटा स्टोरेज
- डेटा को एक्सपोर्ट करने की सुविधा
- यानि सिर्फ बुखार नापना नहीं, बल्कि संदिग्ध व्यक्ति की पहचान, रिकॉर्डिंग और रिपोर्टिंग all-in-one सिस्टम जरूरी होगा।
कंपनियों ने भेजे अपने प्रस्ताव
अब तक कई कंपनियों ने ईमेल या पोस्ट के जरिए अपने आवेदन भेज दिए हैं। इन प्रस्तावों में स्कैनर की टेक्निकल डिटेल्स, कीमत, सर्विस सपोर्ट और कंपनी प्रोफाइल शामिल है। मंत्रालय अब इन प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। जल्द ही टेंडर फाइनल होने के बाद डिवाइस की सप्लाई शुरू हो जाएगी।
गांधी मेडिकल कॉलेज के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. पराग शर्मा मानते हैं कि यह कदम हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम को काफी मजबूत करेगा। उनका कहना है, “थर्मल स्कैनर एक तरह से ‘फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस’ होंगे। इससे वायरस के देश में घुसने से पहले ही खतरे को पहचाना जा सकेगा।”
323 मरीजों की पुष्टि
2025 में सिर्फ कोरोना के ही 28,426 केस और 157 मौतें दर्ज की गईं। मध्यप्रदेश में भी 323 मरीजों की पुष्टि हुई और 9 लोगों की जान गई। इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि किसी भी महामारी से लड़ाई की शुरुआत वहीं होनी चाहिए, जहां से वह देश में घुसती है।
