हरदा | मध्य प्रदेश के हरदा में करणी सेना के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। दो दिन पहले हुए इस घटनाक्रम को लेकर प्रदेशभर में प्रदर्शन और विरोध जारी हैं। अब इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी कूद पड़े हैं। उन्होंने लाठीचार्ज के सीसीटीवी फुटेज और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर मामले की न्यायिक जांच की मांग की है।
दिग्विजय सिंह ने एक वीडियो में राजपूत छात्रावास की छात्रा से बातचीत भी शेयर की है। वीडियो में छात्रा बता रही है कि कैसे पुलिस ने बिना चेतावनी के अचानक लाठीचार्ज शुरू कर दिया, और छात्रावास में घुसकर बेरहमी से लोगों को पीटा।
“जाति पूछ-पूछकर मारा गया”
घटना के बाद कई युवाओं ने सोशल मीडिया पर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि पुलिस ने राजपूतों की जाति पूछकर लाठियां बरसाईं। एक युवक ने पोस्ट किया, “जैसे कश्मीर में आतंकवादी नाम पूछकर मारते थे, वैसे ही हरदा में पुलिसवालों ने जाति पूछकर हमला किया।” वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि लोग छात्रावास की छत पर चढ़कर और टीनशेड के नीचे छिपकर पुलिस की कार्रवाई से बचने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ लोग तो बालकनी से कूदते हुए भी दिखाई दिए।
दिग्विजय सिंह ने कहा, “पुलिस ने बच्चों और महिलाओं पर भी बर्बरता दिखाई। यह लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। इस मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो।”
छात्रा के पिता बोले- बेटी जोर-जोर से रो रही थी
छात्रा के पिता ने बताया कि लाठीचार्ज के वक्त उनकी बेटी बहुत घबरा गई थी। कमरे में बंद लोग बाहर निकलने से डर रहे थे कि कहीं पुलिस उन्हें भी न पीटे। उन्होंने कहा, “बेटी रोती रही, लेकिन किसी ने बाहर निकलने की हिम्मत नहीं की।” करणी सेना के संगठन मंत्री शैलेन्द्र सिंह झाला ने कहा, “जब आतंकवादियों ने कश्मीर में धर्म पूछकर मारा तो पूरा देश साथ खड़ा था, लेकिन आज हरदा में राजपूतों की जाति पूछकर मारपीट हुई और कोई नहीं बोला। क्या राजपूत हिंदू नहीं हैं?”
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि अगर लाठीचार्ज में घायल जीवन सिंह के सिर पर गंभीर वार हुआ है तो धारा 307 के तहत केस क्यों नहीं दर्ज किया गया? उन्होंने कलेक्टर और एसपी को बर्खास्त करने की मांग की है।
मानव अधिकार आयोग को ज्ञापन
हरदा की घटना के विरोध में राजपूत समाज के प्रतिनिधियों ने मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष राजीव टंडन को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा कि इस बर्बरता की तथ्यात्मक जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया है।
