भोपाल | खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि देश में सस्ती दरों पर ऊर्जा उत्पादन को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि विकसित देशों में एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने से उत्पादन क्षमता बढ़ती है और लागत में कमी आती है। भारत को भी ऐसे उपायों को अपनाना चाहिए जिससे कम दर पर ऊर्जा का उत्पादन संभव हो सके। राजपूत नई दिल्ली में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से आयोजित ऊर्जा वार्ता बैठक में बोल रहे थे। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने की। इसमें सभी राज्यों के खाद्य और उद्योग मंत्रियों ने भाग लिया।
राजपूत ने बैठक में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य सरकार की जैव ऊर्जा योजना 2025 का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य में 280 करोड़ रुपये के निवेश से 12 जैव ईंधन परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
परियोजनाओं पर जोर
राजपूत ने कहा कि प्रदेश में शहरी गैस वितरण नीति-2025 लागू की गई है, जिसके तहत अगले 6-8 वर्षों में 55 जिलों में पाइप के माध्यम से घरेलू गैस और वाहनों के लिए सीएनजी उपलब्ध कराई जाएगी।
देश में कम दर पर ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देना होगा : श्री गोविन्द सिंह राजपूत
नई दिल्ली में पैट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा आयोजित ऊर्जा वार्ता बैठक में शामिल हुए खाद्य मंत्री
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— PRO JS Narsinghpur (@pronarsinghpur) July 17, 2025
उन्होंने बताया कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश सरकार ने हरित हाइड्रोजन को लेकर कई समझौते किए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2028 तक एक बड़ी हरित परियोजना शुरू की जाए। साथ ही, राज्य में 2025 तक 20% इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का उपयोग सुनिश्चित करने का भी लक्ष्य तय किया गया है।
धीमी प्रगति पर जताई चिंता
बैठक के दौरान राजपूत ने बीना रिफाइनरी की धीमी प्रगति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि सागर जिले की इस परियोजना में 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी मिलने के बावजूद निर्माण कार्य में तेजी नहीं आ पाई है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी से रिफाइनरी कार्यों में गति लाने का अनुरोध किया।
