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भोपाल: अतिथि शिक्षकों के लिए नई व्यवस्था, स्कूलों में कौशल पुस्तिका और पुस्तकालयों में बेहतर सुविधाएं

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Published On: 17 July 2025

भोपाल | मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए कई नई पहलें की जा रही हैं। एक ओर जहां सांदीपनि और आईसीटी लैब स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को कंप्यूटर कौशल पर आधारित पुस्तिकाएं दी जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति के लिए ई-अटेंडेंस प्रणाली को अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही प्रदेश में पुस्तकालय व्यवस्था को भी सशक्त किया जा रहा है।

कक्षा 6 से 8 के लिए कंप्यूटर कौशल पुस्तिका

स्कूल शिक्षा विभाग ने कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर ज्ञान से जुड़ी उपयोगी पुस्तिका तैयार की है, जो राज्य के सांदीपनि और ICT लैब स्कूलों में वितरित की जा रही है। इन पुस्तकों का प्रकाशन पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा किया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

अतिथि शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस अनिवार्य

शैक्षणिक सत्र 2025–26 में अतिथि शिक्षकों को “हमारे शिक्षक” ऐप के माध्यम से 100% ई-अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। यह व्यवस्था 18 जुलाई से पूरे प्रदेश में लागू होगी। उपस्थिति दर्ज न होने पर संबंधित शिक्षक को मानदेय नहीं दिया जाएगा।

लोक शिक्षण संचालनालय ने पूर्व से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को शैक्षणिक सत्र 2025–26 के लिए री-ज्वॉइनिंग का अंतिम अवसर 17 जुलाई तक दिया है। इसके बाद 18 जुलाई को रिक्त पदों की समीक्षा की जाएगी। प्रदेश में वर्तमान में करीब 60 हजार अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं।

पुस्तकालयों को बनाया जा रहा आधुनिक

राज्य में शिक्षा विभाग 5 केंद्रीय और 36 जिला पुस्तकालय संचालित कर रहा है। भोपाल स्थित मौलाना आजाद केंद्रीय पुस्तकालय को इस वर्ष पर्यटन विकास निगम के सहयोग से मरम्मत और सुविधाओं के विस्तार के तहत अपग्रेड किया गया है। यहां 32 केबिन मॉडल स्टडी रूम तैयार किए जा रहे हैं। पुस्तकालय में एक लाख से अधिक पुस्तकें हैं, और इंटरनेट, रीडिंग हॉल, पत्र-पत्रिकाएं, सेमिनार और दीदी कैंटीन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

भोपाल के पुराने शहर में स्थित इस केंद्रीय पुस्तकालय में नि:शुल्क पुस्तक मेला भी लगाया गया है। साथ ही दीदी कैंटीन का संचालन स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह को सौंपा गया है, जिससे महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

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