भोपाल | स्वच्छता सर्वेक्षण 2024–25 में मध्यप्रदेश के आठ शहरों को मिले राष्ट्रीय पुरस्कारों पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता प्रवीण धौलपुरे ने कहा कि अवॉर्ड पाने वाले शहरों की चमक-दमक के पीछे जिन हाथों की मेहनत है, उन्हें आज भी न सुरक्षा मिली है, न सम्मान और न स्थायित्व। धौलपुरे ने कहा कि सरकारें स्वच्छता का श्रेय सिर्फ नगर निगमों की रिपोर्ट कार्ड और नेताओं की घोषणाओं में समेट रही हैं, जबकि जमीनी स्तर पर सफाईकर्मियों की हालत दयनीय है।
उन्होंने सवाल उठाया, “ये तमाशा नहीं तो और क्या है, जहां ट्रॉफी तो नगर निगम को मिलती है, लेकिन सीवर में उतरने वाला कर्मी अब भी बिना उपकरण और बीमा के जोखिम उठा रहा है?”।
सफाई उत्सव नहीं
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश के अधिकांश सफाईमित्र आज भी ठेका प्रथा के तहत काम कर रहे हैं। उन्हें स्थायी नौकरी नहीं दी गई है, और न ही किसी सामाजिक सुरक्षा योजना में समुचित शामिल किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई के दौरान बीमार या दिवंगत हुए सफाईकर्मियों के परिजनों को समुचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिल पाता।
उन्होंने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने अब तक सफाईकर्मियों के लिए कोई समर्पित स्वास्थ्य बीमा, आवास योजना या शिक्षा सहायता योजना लागू नहीं की है। “जब तक झाड़ू पकड़ने वाले हाथों को इज्जत, अधिकार और अवसर नहीं मिलते, तब तक कोई भी शहर वास्तव में स्वच्छ नहीं कहा जा सकता,” उन्होंने कहा।
5 प्रमुख मांगें
- प्रेस विज्ञप्ति में धौलपुरे ने भारत सरकार और प्रदेश सरकार से पांच अहम मांगें रखी हैं:
- सभी सफाईकर्मियों को स्थायी रोजगार दिया जाए, संविदा प्रथा समाप्त की जाए।
- स्वास्थ्य बीमा और ईपीएफ की गारंटी दी जाए।
- मृतक सफाईकर्मियों के परिजनों को सम्मानजनक मुआवजा और पुनर्वास पैकेज मिले।
- उनके बच्चों के लिए शिक्षा व छात्रवृत्ति योजनाएं शुरू हों और पक्के आवास उपलब्ध कराए जाएं।
- नगर निगमों को सामाजिक जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ काम करने के लिए बाध्य किया जाए।
धौलपुरे ने चेतावनी दी कि अगर सरकारें सिर्फ फोटो और पुरस्कार की राजनीति करती रहीं, तो स्वच्छता मिशन एक दिखावटी अभियान बनकर रह जाएगा।
