भोपाल | राजधानी भोपाल में नगर निगम परिषद की आगामी 24 जुलाई को होने वाली बैठक से पहले नाम बदलने की राजनीति गरमा गई है। जहां एक ओर अशोका गार्डन को ‘राम बाग’ और विवेकानंद पार्क के पास के चौराहे को ‘विवेकानंद चौक’ नाम देने के प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। वहीं, दूसरी ओर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने राजधानी के हमीदिया अस्पताल, कॉलेज और स्कूल का नाम बदलने की मांग कर नई बहस छेड़ दी है।
अध्यक्ष का दावा
निगम अध्यक्ष का दावा है कि नवाब हमीउल्ला का भारत की स्वतंत्रता और एकता से कोई जुड़ाव नहीं था। उनका कहना है कि नवाब हमीउल्ला भोपाल रियासत को पाकिस्तान में मिलाना चाहते थे और भारत विरोधी रुख के लिए कुख्यात थे। उन्होंने आरोप लगाया कि नवाब ने विलय आंदोलन के दौरान तिरंगा फहराने वाले डाकघर कर्मचारी को गिरफ्तार करवाया और आंदोलनकारियों पर गोलियां चलवाईं, जिसमें छह लोग शहीद हो गए थे।
CM को लिख चुके हैं पत्र
सूर्यवंशी ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में जून महीने में मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा था। पत्र में मांग की गई कि अस्पताल, स्कूल और कॉलेज जैसे शैक्षणिक व स्वास्थ्य संस्थानों के नाम ऐसे राष्ट्रभक्तों के नाम पर रखे जाएं, जिन्होंने भारत के लिए त्याग किया। चूंकि संस्थानों का नाम बदलने का अधिकार नगर निगम परिषद के दायरे से बाहर है, इसलिए उन्होंने यह मांग सीधे मुख्यमंत्री से की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिषद के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सड़कों और चौराहों के नाम पहले ही बदले जा चुके हैं, जैसे कि सितंबर 2023 में ‘हमीदिया रोड’ को ‘गुरुनानक मार्ग’ नाम दिया गया था। अब उनका उद्देश्य उन सार्वजनिक संस्थाओं के नाम बदलवाना है, जो आज भी नवाब हमीउल्ला जैसे विभाजन समर्थक व्यक्ति के नाम से जुड़ी हैं।
इतिहास सुधारने की कोशिश
सूर्यवंशी ने कहा कि वे मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से मिलकर इस मांग को फिर दोहराएंगे। मुझे विश्वास है कि इस पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। इस बीच इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। एक ओर इसे इतिहास को सुधारने की कोशिश कहा जा रहा है, तो दूसरी ओर कुछ लोग इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रयास भी बता रहे हैं। निर्णय जो भी हो, पर भोपाल की राजनीति में नामों का यह खेल अभी थमने वाला नहीं लगता।
