,

सर्पदंश से लेकर सागौन फर्नीचर तक, भोपाल में वन विकास निगम की वर्षगांठ पर CM ने रखे बड़े विज़न

Author Picture
Published On: 24 July 2025

भोपाल | राजधानी भोपाल में आयोजित भारतीय वन प्रबंध संस्थान (IIFM) के कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन विकास निगम की 50वीं वर्षगांठ पर संबोधित करते हुए न केवल संस्थान की उपलब्धियों को रेखांकित किया, बल्कि वनों से जुड़ी चुनौतियों और संभावनाओं पर भी गहराई से बात की। कार्यक्रम में वन राज्य मंत्री, विभागीय अधिकारी और वन विशेषज्ञ भी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने सबसे पहले प्रदेश में सर्पदंश से हो रही मौतों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नागपंचमी आने वाली है और हमारे राज्य में नाग एक चुनौती बन गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सबसे अधिक लोगों की मृत्यु सर्पदंश की घटनाओं के कारण होती है, लेकिन दुख की बात यह है कि अब तक सांपों की कोई गिनती की व्यवस्थित प्रक्रिया देश में मौजूद नहीं है। उन्होंने वन विभाग से अपील की कि सर्पदंश की घटनाओं को चुनौती की तरह लिया जाए और बचाव के समुचित उपाय किए जाएं।

बताया गौरवपूर्ण

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने वन विकास निगम की अब तक की यात्रा को “गौरवपूर्ण” बताते हुए कहा कि आज निगम न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी काम कर रहा है। उन्होंने निगम को भविष्य की संभावनाओं की ओर देखने की सलाह दी और कहा कि जब कोई संस्था 50 साल का सफर तय कर लेती है तो उसे अतीत से सीखकर भविष्य की बड़ी छलांग के लिए तैयार रहना चाहिए।

फर्नीचर उद्योग पर बोलते हुए उन्होंने जोधपुर का उदाहरण दिया और बताया कि वहां आम और बबूल की लकड़ी से बना फर्नीचर विश्वभर में निर्यात हो रहा है। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा, “हमारे यहां तो आम और बबूल की लकड़ी को जलाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अगर हम यहां के सागौन से फर्नीचर बनाएं तो दुनिया पागल हो जाएगी।”

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वन संपदा की सही दिशा में नीलामी, संसाधनों के अधिकतम उपयोग और फर्नीचर उद्योग को बढ़ावा देने की बात भी कही। उन्होंने वन विकास निगम से कहा कि वह अब पारंपरिक कामों से आगे बढ़े और आधुनिक बाजार की मांग को समझे।

देश की जीवनरेखा

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वनों के कारण ही मध्यप्रदेश हिमालय की तरह शक्तिशाली बन पाया है। हिमालय से निकलने वाली नदियां जिस प्रकार उत्तर भारत को जीवन देती हैं, उसी तरह मध्यप्रदेश की जलधाराएं अपने सघन वनों के भरोसे से देश की जीवनरेखा बन रही हैं।

टाइगर राज्य के रूप में मध्यप्रदेश की पहचान को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा बाघ इसी राज्य में हैं। चंबल की नदियों में घड़ियालों की मौजूदगी और जंगलों में विविध वन्यजीवों का संरक्षण राज्य के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा, “कई सड़कों पर दिन में हम इंसान चलते हैं और रात को टाइगर। यह हमारे वन प्रबंधन की सफलता है।”

दिया ये उदाहरण

वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उन्होंने गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा सेंटर का उदाहरण देते हुए कहा कि किस तरह वहां रेगिस्तान और समुद्री क्षेत्र के जीवों को संरक्षित किया जा रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश में भी इसी तर्ज पर अधिक रेस्क्यू सेंटर और आधुनिक चिड़ियाघर विकसित करने की बात कही।

किया आग्रह

अंत में मुख्यमंत्री ने वन विकास निगम से आग्रह किया कि वह केवल संसाधन प्रबंधन तक सीमित न रहे, बल्कि वन्यजीवों और मानव जीवन के बीच संतुलन को साधने वाली योजनाओं पर भी सक्रियता से काम करे। जनता के मन में वन्यजीवों के प्रति एक उत्कंठा होती है। उस लगाव को दिशा देने का काम वन विभाग और वन विकास निगम मिलकर कर सकते हैं।

Related News
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp