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CM मोहन यादव बोले- “MP के जलदूतों ने रचा इतिहास, सदानीरा अभियान बना जनसहभागिता का महापर्व”

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Published On: 28 July 2025

भोपाल | मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, “जल की बूंद-बूंद बचाना अब मध्यप्रदेश के हर नागरिक का संकल्प बन चुका है। हम सिर्फ पानी नहीं, आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवार रहे हैं।” यह बात उन्होंने सोमवार को विधानसभा परिसर के सेंट्रल हॉल में आयोजित जलगंगा संवर्धन अभियान की प्रदर्शनी “सदानीरा” के शुभारंभ अवसर पर कही।

सीएम ने इसे “जनसहभागिता का ऐतिहासिक मॉडल” बताते हुए जलदूतों की भूमिका को प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान कोई सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक जनांदोलन बन चुका है, जिसमें जनता ही नायक है।

90 दिन, 2.30 लाख जलदूत

मध्यप्रदेश के 90 दिन चले इस अभियान ने जो परिणाम दिए हैं, वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए मिसाल भी हैं। अभियान में 2 लाख 30 हजार से अधिक जलदूतों ने सक्रिय भागीदारी की, जिन्होंने गांव-गांव, खेत-खेत तक पहुंचकर पानी की चिंता को आंदोलन में बदला। इन जलदूतों ने 84,726 खेत-तालाब, 1,04,276 कुओं का रिचार्ज और 1,283 अमृत सरोवरों का निर्माण कराया। इतना ही नहीं, जगह-जगह जल संरक्षण को लेकर रैलियां, जनचर्चाएं और श्रमदान भी हुआ।

‘सदानीरा’ बनी जल संरक्षण की गवाह

सेंट्रल हॉल में लगी “सदानीरा” प्रदर्शनी न सिर्फ इस अभियान की झलक दिखाती है, बल्कि यह इस आंदोलन की प्रेरणा भी बन रही है। इस प्रदर्शनी में हर जिले की जल संरक्षण यात्रा, श्रमदान की तस्वीरें, गांवों में बने तालाबों की before-after झलक और जलदूतों की कहानियां दर्शाई गई हैं। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा, “यह जल नहीं, जनता का परिश्रम और प्रकृति के लिए प्रेम है, जो इन तस्वीरों में झलकता है।”

प्रदेश के हर नागरिक को जोड़ने की तैयारी

सरकार अब इस अभियान को आगे बढ़ाकर हर ग्राम पंचायत तक ले जाने की योजना बना रही है। जल संरक्षण सिर्फ योजना नहीं, जीवनशैली बन जाए यही अब सरकार का उद्देश्य है। मध्यप्रदेश में “सदानीरा” सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि यह जल क्रांति का प्रतीक बन चुकी है।

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