भोपाल | अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर मंगलवार को राजधानी भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मध्यप्रदेश ने एक बार फिर साबित किया कि वह न केवल टाइगर स्टेट है, बल्कि वन्य जीव संरक्षण के मामले में पूरे देश में नेतृत्व कर रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर उन्होंने वन्य जीवों के संरक्षण, प्रबंधन और जागरूकता से जुड़ी कई अहम योजनाओं व दस्तावेजों का लोकार्पण किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने तीन वन्य जीव ट्रांसपोर्ट वाहन, तीन पशु चिकित्सक वाहन और दो डॉग स्क्वायड वाहनों को हरी झंडी दिखाई। साथ ही उन्होंने इन वाहनों में लगी आधुनिक सुविधाओं का अवलोकन भी किया। सीएम ने वन कर्मियों, ईको विकास समितियों और वन सुरक्षा समूहों को उनके बेहतरीन काम के लिए सम्मानित किया और वन्य जीवों पर केंद्रित प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया।
कई योजनाओं का शुभारंभ
इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और फिल्म टीज़र का भी विमोचन किया गया। इनमें ‘पेंच टाइगर रिजर्व में स्थानीय समुदाय की सहभागिता’, ‘कान्हा का मृत्युंजय’, ‘सतपुड़ा: कल, आज और कल’ और ‘चीतों की वापसी पर केंद्रित डॉक्यूमेंट्री’ शामिल हैं। इसके अलावा राज्य वन्य जीव योजना 2023-2043 के हिंदी संस्करण, गिद्ध गणना रिपोर्ट, और हाथियों की पहचान हेतु तैयार डोजियर का विमोचन भी हुआ।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने वन्यजीवों के परिवहन के लिए तीन वन्यजीव वाहन, तीन वन्यजीव चिकित्सक वाहन और दो डॉग स्क्वायड वाहनों का… pic.twitter.com/ZsGQhQceKD
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) July 29, 2025
मोबाइल ऐप लॉन्च
मुख्यमंत्री ने “गजरक्षक” नाम का मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया, जो हाथियों और इंसानों के बीच टकराव की घटनाओं को रोकने में मदद करेगा। मध्यप्रदेश टाइगर रिजर्व प्रबंधन में भी देशभर में शीर्ष पर बना हुआ है। पेंच टाइगर रिजर्व को इस बार पूरे देश में सर्वोच्च रैंकिंग मिली है, जबकि बांधवगढ़, कान्हा, सतपुड़ा और संजय जैसे रिजर्व भी सर्वश्रेष्ठ माने गए हैं।
9 टाइगर रिजर्व
राज्य में कुल 9 टाइगर रिजर्व हैं, जिनमें बांधवगढ़ सबसे ज्यादा बाघों वाला और विदेशी पर्यटकों के बीच सबसे लोकप्रिय माना जाता है। बीते 5 वर्षों में इन अभयारण्यों में लगभग 8.24 लाख पर्यटक पहुंचे, जिससे करीब 61 करोड़ रुपये की आय हुई।
