उमरिया | बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ की शिकार की घटना ने मध्य प्रदेश के वन्यजीव सुरक्षा तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। वन विभाग ने इस मामले में तेज कार्रवाई करते हुए महज पांच दिनों के भीतर 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही, शक जताया जा रहा है कि इस पूरे मामले के पीछे एक संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोह का हाथ हो सकता है।
घटना की शुरुआत 27 जुलाई को धमोखर रेंज के अंतर्गत ग्राम रोहनिया से हुई, जहां वन विभाग की छापेमारी में हरदुल बैगा नामक व्यक्ति के पास से बाघ के 13 नाखून और 8 दांत बरामद हुए। पूछताछ में हरदुल ने शिकार की बात कबूल कर ली, जिसके बाद मामले की परतें खुलने लगीं।
जांच में ये बात आई सामने
हरदुल के बयान के आधार पर ओमप्रकाश सिंह और रामकृपाल सिंह को भी गिरफ्तार किया गया। इसके बाद, विभाग की मगधी और धमोखर रेंज की संयुक्त टीम ने दबिश देकर दशरथ वैदिक, राम भवन सिंह, चेतराम अगरिया और प्रभु बैगा को भी हिरासत में ले लिया।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने बाघ को पहले मार डाला और फिर उसके शव को टुकड़ों में काटकर कोर एरिया के एक परित्यक्त बोरवेल में फेंक दिया। जब वहां से अवशेष बरामद हुए, तो विभाग की आशंकाएं सही साबित हुईं। वन विभाग के अधिकारी इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत एक गंभीर अपराध मानते हुए सख्त रुख अपना चुके हैं।
वन विभाग का गहराया शक
वन विभाग को आशंका है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है बल्कि इसके पीछे कोई संगठित वन्यजीव तस्कर गिरोह सक्रिय हो सकता है जो बाघ के अंगों की अवैध तस्करी में शामिल है। फिलहाल, पूछताछ का दायरा बढ़ाया जा रहा है। साथ ही, कुछ और संदिग्धों की तलाश की जा रही है।
