नई दिल्ली | झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का आज सुबह नई दिल्ली में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे। शिबू सोरेन ने झारखंड की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और राज्य के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी। इस दुखद समाचार की पुष्टि उनके बेटे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की। उनके निधन की खबर से पूरे झारखंड में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, “आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूं।”
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का आज सुबह नई दिल्ली में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं।
आज मैं शून्य हो गया हूँ…
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 4, 2025
शिबू सोरेन का सफर
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रमुख नेता और संस्थापक संरक्षक शिबू सोरेन ने लगभग चार दशकों तक पार्टी का नेतृत्व किया। 11 जनवरी 1944 को बिहार के हजारीबाग जिले (वर्तमान झारखंड) में जन्मे सोरेन को जनता में ‘दिशोम गुरु’ और ‘गुरुजी’ के नाम से सम्मानित किया जाता था। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत आदिवासी समाज के शोषण और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से की।
1970 के दशक में धनकटनी आंदोलन समेत कई महत्वपूर्ण आंदोलनों का नेतृत्व करते हुए उन्होंने आदिवासी समुदाय की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया। उनका संघर्ष अंततः झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में निर्णायक साबित हुआ।
तीन बार बने झारखंड के मुख्यमंत्री
1980 में शिबू सोरेन पहली बार लोकसभा के सदस्य बने और इसके बाद उन्होंने लगातार संसद में आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया। झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने की दिशा में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ।
राज्य बनने के बाद शिबू सोरेन तीन बार मुख्यमंत्री बने, 2005, 2008 और 2009 में हालांकि राजनीतिक अस्थिरता और गठबंधन की खींचतान के कारण उनके कार्यकाल लंबे नहीं चल सके। इसके बावजूद, उन्होंने आदिवासी कल्याण, रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की।
झारखंड में शोक की लहर
मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में सेवा देने वाले शिबू सोरेन का जीवन आदिवासी समाज के अधिकार, स्वाभिमान और विकास के लिए समर्पित रहा। उनकी राजनीतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। शिबू सोरेन की राजनीतिक विरासत और झारखंड के गठन में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनकी कमी झारखंड की राजनीति में एक बड़ा नुकसान है। पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन से पूरे झारखंड में शोक की लहर है।
