इंदौर | मध्य प्रदेश के इंदौर का खजराना गणेश मंदिर एक बार फिर से चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि भगवान गणेश के लिए बन रहा भव्य मुकुट है। जी हां, यहां भगवान गणेश के लिए पहले चांदी का और फिर स्वर्ण मुकुट तैयार किया जा रहा है, जिसकी प्रक्रिया श्रद्धा और शिल्प का अद्भुत संगम है।
अंतिम चरण में काम
मंदिर के पुजारी पंडित अशोक भट्ट के अनुसार, चांदी का मुकुट तैयार करने का काम अंतिम चरण में है। इसे तैयार होने में करीब 8 से 10 दिन और लगेंगे। खास बात यह है कि यह मुकुट सिर्फ शो-पीस नहीं, बल्कि एक ट्रायल वर्जन है। भगवान गणेश को पहले यही मुकुट पहनाकर देखा जाएगा। डिजाइन ठीक है या नहीं, फिटिंग में कोई दिक्कत तो नहीं। सब कुछ संतोषजनक रहा, तो फिर उसी डिजाइन पर स्वर्ण मुकुट बनाने का कार्य आरंभ होगा।
डिजाइन तैयार
पिछले महीने मंदिर समिति द्वारा एक विशेष टीम का गठन किया गया था, जिसने स्वर्ण मुकुट की डिजाइन तैयार की है। यह डिजाइन ज्वेलर्स को सौंप दी गई थी। इस मुकुट को सीधे सोने में नहीं बनाया जा रहा। पहले चांदी में बनाकर सभी तकनीकी और सौंदर्य पहलुओं की जांच की जाएगी।
पंडित भट्ट का कहना है कि स्वर्ण मुकुट बनने में करीब तीन से चार महीने का वक्त लगेगा। ऐसे में यह मुकुट दिसंबर या जनवरी तक तैयार हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि खजराना गणेश मंदिर में भगवान का स्वर्ण आभूषणों से श्रृंगार साल में केवल दो बार गणेश चतुर्थी और तिल चतुर्थी पर ही किया जाता है। ऐसे में नए मुकुट का उपयोग भी विशेष अवसरों पर ही होगा।
श्रद्धालुओं के बीच उत्साह
जानकारी के मुताबिक, स्वर्ण मुकुट बनाने में पुराने स्वर्ण आभूषणों का भी उपयोग किया जाएगा, जो पहले से भगवान गणेश, रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ को अर्पित किए गए थे। इस पारंपरिक आस्था को आधुनिक साज-सज्जा से जोड़ने की यह कोशिश श्रद्धालुओं के बीच खासा उत्साह पैदा कर रही है। देशभर से लाखों भक्त खजराना मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में भगवान गणेश को यह नया मुकुट न केवल एक भव्य रूप देगा, बल्कि भक्तों की आस्था को और प्रगाढ़ करेगा। मंदिर प्रशासन उम्मीद कर रहा है कि मुकुट का स्वर्ण संस्करण तय समय पर भक्तों के दर्शन के लिए सुलभ होगा।
