भोपाल | मध्य प्रदेश में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने एक और सराहनीय कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को आयोजित स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप-2025 कार्यक्रम में घोषणा की कि एमपी बोर्ड की 12वीं कक्षा में प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल करने वाली अमरपाटन की प्रियल द्विवेदी की आगे की पढ़ाई वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (वीआईटी) में सरकार की ओर से करवाई जाएगी।
बड़ा बदलाव
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश निरंतर हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002-03 में मध्य प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय जहां 11 हजार रुपये थी, वहीं अब यह बढ़कर 1 लाख 52 हजार रुपये पर पहुंच गई है। सिंचाई के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले डेढ़ वर्ष में सिंचाई का रकबा 7.5 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नदी जोड़ो अभियान से कई जिलों को फायदा मिलेगा, जिससे कृषि और जल प्रबंधन में बड़ा बदलाव आएगा।
प्रतिबद्धता पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पढ़ाई और तकनीकी शिक्षा में अग्रणी छात्रों को राज्य सरकार हर संभव मदद दे रही है। इसके तहत 12वीं बोर्ड में 75% से अधिक अंक प्राप्त करने और विद्यालय में प्रथम आने वाले छात्रों को लैपटॉप और स्कूटी देने की व्यवस्था की गई है।
कार्यक्रम में जब प्रियल द्विवेदी ने अपनी इच्छा व्यक्त की कि वह वीआईटी में उच्च शिक्षा हासिल करना चाहती हैं, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा, तो मुख्यमंत्री ने तुरंत उनकी पूरी पढ़ाई का खर्च सरकार द्वारा वहन करने की घोषणा की।
छात्राओं को सम्मानित
इस अवसर पर प्रदेश की 66 मेधावी छात्राओं को सम्मानित किया गया। प्रत्येक जिले की टॉपर छात्रा को 50 हजार रुपये, प्रशस्ति-पत्र, और अन्य पुरस्कार प्रदान किए गए। वहीं प्रियल द्विवेदी को विशेष सम्मान स्वरूप 1 लाख रुपये का चेक और उनके विद्यालय को भी 1 लाख रुपये की अनुदान राशि दी गई।
झलक रही खुशी
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आपकी मेहनत और लगन ही प्रदेश का भविष्य है। सरकार हर कदम पर आपके साथ है। शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल करने वालों के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। कार्यक्रम में मौजूद छात्राओं और उनके परिजनों के चेहरे पर गर्व और खुशी साफ झलक रही थी। कई अभिभावकों ने मुख्यमंत्री के इस निर्णय को प्रेरणादायक और दूरदर्शी बताया।
