नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने 97 एलसीए तेजस मार्क 1ए लड़ाकू विमानों की खरीद को मंज़ूरी दी है, जिसका कुल मूल्य लगभग 62,000 करोड़ रुपये है। यह फैसला वायुसेना की आधुनिक लड़ाकू विमान शक्ति को सुदृढ़ करने और देश की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। इस निर्णय के बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) इन विमानों का उत्पादन शुरू करेगा।
केंद्र सरकार ने भारतीय वायुसेना की क्षमता को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने 97 एलसीए तेजस मार्क 1ए लड़ाकू विमानों की खरीद की मंज़ूरी दी है, जिसकी कुल लागत लगभग 62,000 करोड़ रुपये बताई गई है।
‘मेक इन इंडिया’ को मिली मजबूती
भारतीय वायुसेना ने तेजस विमानों के लिए दूसरा बड़ा ऑर्डर दिया है, जिससे उसके पास अब कुल 180 एलसीए मार्क 1ए जेट विमान होंगे। ये विमान धीरे-धीरे पुराने मिग-21 लड़ाकू विमानों की जगह लेंगे। इस सौदे से ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों को मजबूती मिलेगी और देश भर के रक्षा उत्पादन से जुड़े सैकड़ों छोटे और मध्यम उद्योगों को रोजगार और काम मिलेगा। भारतीय वायुसेना के लिए तेजस मार्क 1ए लड़ाकू विमानों में कई उन्नत एवियोनिक्स और रडार प्रणालियां शामिल हैं, जो पिछले संस्करणों की तुलना में काफी बेहतर हैं। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इन नए विमानों के 65% से अधिक पुर्जे स्वदेशी हैं, जो भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं।
मिलेंगे 97 नए तेजस विमान
भारतीय वायुसेना ने अपने स्वदेशी लड़ाकू बेड़े को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने स्पेन यात्रा के दौरान 97 अतिरिक्त एलसीए तेजस जेट विमानों की खरीद की योजना की घोषणा की। भविष्य में एचएएल से 200 से अधिक एलसीए मार्क 2 और 200 उन्नत मध्यम 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के ऑर्डर की उम्मीद है। इसके अलावा, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 156 प्रचंड हेलीकॉप्टर और 84 सुखोई-30एमकेआई विमानों के अपग्रेड की मंज़ूरी दी है, जिनकी कुल लागत 1.6 लाख करोड़ रुपये है। वर्तमान में वायुसेना के पास दो स्क्वाड्रन तेजस विमान हैं, और आने वाले वर्षों में यह देश का सबसे बड़ा लड़ाकू बेड़ा बनने की उम्मीद है।
तेजस में उड़ान भरने वाले पहले प्रधानमंत्री बने मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के प्रशिक्षण संस्करण में उड़ान भरकर देश की रक्षा उत्पादन क्षमता का समर्थन किया। वह इस विमान में उड़ान भरने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने और उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि इससे उनके स्वदेशी क्षमताओं में विश्वास और मजबूत हुआ।
