ज्योतिष | पंचांग के अनुसार, हर मास के कृष्ण पक्ष की 15वीं तिथि को अमावस्या कहा जाता है। इसे सनातन परंपरा में पितरों का दिन माना गया है। इस दिन श्राद्ध, तर्पण और पितरों को समर्पित कर्मकांड करने का विशेष महत्व होता है। इसे पिठोरी अमावस्या भी कहा जाता है। इस साल पिठोरी अमावस्या 22 अगस्त को मनाया जायेगा। अमावस्या का महत्व तब और अधिक बढ़ जाता है जब यह भाद्रपद माह में आती है। इस अवसर पर लोग धार्मिक कार्यों के साथ-साथ अपने पितरों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद की कामना करते हुए विशेष पूजन-अर्चन करते हैं।
पिठोरी अमावस्या का दिन पितरों की पूजा और तर्पण के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पितरों का स्मरण करने पर उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
पिठोरी अमावस्या
पिठोरी अमावस्या भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस दिन पितरों की पूजा और श्राद्ध का विशेष महत्व होता है, क्योंकि अमावस्या के देवता पितर माने गए हैं। मान्यता है कि इस दिन श्राद्ध, तर्पण और पितरों के लिए किए गए दान से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। इसे पिठोरी अमावस्या इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन महिलाएं आटे से 65 पिठोरियां बनाकर उनकी पूजा करती हैं, जो संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए शुभ मानी जाती है। इस दिन व्रत-पूजा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है।
मुहूर्त
पंचांग के अनुसार इस साल पिठोरी अमावस्या या भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि 22 अगस्त 2025 को सुबह 11:55 बजे से प्रारंभ होकर 23 अगस्त 2025 को सुबह 11:35 बजे तक रहेगी। इस वजह से लोग अपनी-अपनी परंपरा और मान्यता के अनुसार इस पर्व को दो दिनों तक मनाएंगे। हालांकि, दृक पंचांग की गणना के अनुसार पिठोरी अमावस्या का मुख्य पर्व 22 अगस्त 2025 को ही मनाया जाएगा।
धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में पिठोरी अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार इस दिन माता पार्वती ने इंद्राणी को व्रत की कथा सुनाकर इसके महत्व को बताया था। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत के पुण्य से स्वस्थ, सुंदर और बलशाली संतान की प्राप्ति होती है। परंपरा के अनुसार महिलाएं इस दिन आटे से 64 योगिनियों की प्रतिमाएं बनाकर उनकी पूजा करती हैं। साथ ही देवी पूजा के साथ पितृ पूजा का भी विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि पिठोरी अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण या पिंडदान करने से वंश वृद्धि और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पिठोरी अमावस्या का शुभ प्रभाव कुछ खास राशियों पर अधिक पड़ेगा। मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि के जातकों के लिए यह अमावस्या लाभकारी साबित होगी।
मिथुन राशि
पिठोरी अमावस्या का मिथुन राशि पर इस बार विशेष शुभ प्रभाव देखने को मिलेगा। इस दिन मिथुन जातकों को करियर और कारोबार में नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होंगे और धन लाभ की संभावना भी बनेगी। इस अमावस्या पर किए गए धार्मिक कार्य और व्रत से मिथुन राशि वालों को पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
कन्या राशि
कन्या राशि वालों के लिए पिठोरी अमावस्या का दिन शुभ फल देने वाला रहेगा। इस दिन किए गए पूजा-पाठ और व्रत से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। लंबे समय से अटके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है और करियर में उन्नति के नए अवसर मिल सकते हैं। दांपत्य जीवन में सौहार्द बढ़ेगा और पारिवारिक रिश्तों में मजबूती आएगी।
धनु राशि
पिठोरी अमावस्या का धनु राशि पर विशेष रूप से शुभ प्रभाव देखने को मिलेगा। इस दिन किए गए धार्मिक कार्य और पितरों के लिए तर्पण से जातकों को सौभाग्य और उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होगा। धनु राशि के लोगों के लिए यह समय आर्थिक प्रगति का संकेत लेकर आ रहा है, साथ ही रुके हुए कार्य भी गति पकड़ेंगे।
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए पिठोरी अमावस्या का दिन अत्यंत शुभ रहने वाला है। इस अमावस्या पर किए गए धार्मिक कार्यों और पितरों के प्रति श्रद्धा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। रुके हुए कार्यों में प्रगति मिलने की संभावना है और आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। परिवार में खुशहाली और सामंजस्य बढ़ेगा, वहीं संतान पक्ष से भी शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।
