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MP के आशीष शर्मा ने 34 साल से संभाला राजीव गांधी का चश्मा, बनी इतिहास की अनोखी मिसाल

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Published On: 22 August 2025

रीवा | MP के रीवा जिले से राजनीति से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सामने आया है। यहां कांग्रेस से जुड़े आशीष शर्मा ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का चश्मा पिछले 34 सालों से संभालकर रखा हुआ है। आशीष शर्मा ने न सिर्फ इसे सुरक्षित रखा बल्कि अपने परिवार और स्थानीय लोगों के बीच भी इसकी अहमियत बनाए रखी। खास बात यह है कि इस दौरान कई बड़े नेता और धनी व्यापारी करोड़ों रुपये की पेशकश कर इस चश्मे को खरीदना चाहते थे, लेकिन आशीष शर्मा ने इसे कभी बेचा नहीं। उनके लिए यह चश्मा एक ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे उन्होंने बड़े स्नेह और जिम्मेदारी के साथ संजोकर रखा है।

मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक अनोखी खबर सामने आई है। यहां कांग्रेस से जुड़े आशीष शर्मा ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का चश्मा पिछले 34 सालों से अपने पास सुरक्षित रखा हुआ है।

बना इतिहास का प्रतीक

आशीष शर्मा का कहना है कि उनके पास सुरक्षित रखा गया यह चश्मा, सिर्फ एक साधारण वस्तु नहीं, बल्कि राजनीतिक इतिहास और गांधी परिवार के प्रति उनके सम्मान का प्रतीक है। आशीष शर्मा मानते हैं कि राजीव गांधी का व्यक्तित्व और उनके देशहित में किए गए योगदान को यह चश्मा हमेशा याद दिलाता रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इसे सुरक्षित रखने के पीछे उनकी यही इच्छा रही है कि आने वाली पीढ़ियां इस चश्मे को देखकर उस दौर की राजनीति और उस समय की भावनाओं को करीब से महसूस कर सकें।

रीवा की शान बना चश्मा

रीवा जिले के स्थानीय लोग पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के चश्मे को लेकर गर्व महसूस करते हैं। उनका कहना है कि यह धरोहर केवल आशीष शर्मा की नहीं, बल्कि पूरे इलाके की शान है। लोगों का मानना है कि समय के साथ यह चश्मा एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक बन गया है, जो आज भी राजीव गांधी की यादों को ताज़ा करता है और आने वाली पीढ़ियों को उस दौर की राजनीति से जोड़ता है।

34 साल से सुरक्षित

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी ऐतिहासिक वस्तुएं, चाहे वे कितनी ही साधारण क्यों न दिखें, देश के इतिहास और राजनीति की धरोहर होती हैं। रीवा निवासी आशीष शर्मा द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का चश्मा 34 वर्षों से सहेजकर रखना इसी का उदाहरण है। यह कदम उनकी वफादारी और सम्मान की मिसाल पेश करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस चश्मे की असली कीमत पैसे में नहीं, बल्कि इससे जुड़ी भावनाओं और इतिहास में है, जो आने वाली पीढ़ियों को उस दौर की राजनीति और संवेदनाओं से जोड़ता रहेगा।

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