सतना | मध्य प्रदेश के सतना शहर से सटे गांव शेरगंज, जो ग्राम पंचायत बाबूपुर का हिस्सा है, वहां के हालात देखकर लोगों में नाराज़गी साफ झलक रही है। पंचायत के सरपंच रामकेश अहिरवार उर्फ राहुल राज रावण का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है, लेकिन विकास के दावे अब केवल कागज़ों तक ही सीमित दिख रहे हैं।
बरसात ने खोली पोल
बरसात का पानी सरपंच के मोहल्ले में ही घुस गया, जिससे कई घर जलमग्न हो गए। नतीजा यह रहा कि लोगों का चूल्हा तक नहीं जल सका और कई परिवार भूखे सोने को मजबूर हुए। स्थानीय लोगों का कहना है कि तीन वर्षों में न तो जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था की गई और न ही नालियों की नियमित सफाई। नतीजा यह है कि नालियां पूरी तरह जाम पड़ी हैं और चारों ओर गंदगी फैली हुई है। सवाल उठता है कि जब सरपंच के अपने मोहल्ले का यह हाल है तो बाकी पंचायत की स्थिति कैसी होगी।
फंड खर्च, लेकिन काम अधूरे
गांववालों ने आरोप लगाया कि सफाई और विकास के नाम पर बजट तो खर्च हुआ, लेकिन काम केवल कागज़ों पर ही दर्ज रहा। जमीन पर विकास कार्य नज़र नहीं आते। लोग बताते हैं कि शिकायत करने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
गांव के लोग कहते हैं कि सरपंच अपनी असफलता को छिपाने के लिए हमेशा यह तर्क देते हैं कि वे निम्न वर्ग से आते हैं और इसी आधार पर सहानुभूति बटोरने की कोशिश करते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि पर्याप्त बजट होने के बावजूद योजनाएं नहीं बन पाईं और विकास का पहिया थम गया। वहीं, पास की ही पंचायत ने योजनाबद्ध तरीके से काम कर जिले की 692 पंचायतों में चौथा स्थान हासिल किया।
गांववालों की पीड़ा अनसुनी
गांव के लोगों का कहना है कि वे अपनी समस्याएं बार-बार लिखित रूप में सरपंच तक पहुंचाते हैं, लेकिन उनकी फरियाद पर कोई असर नहीं होता। गलियों की दुर्दशा, जलभराव और सफाई की समस्या के कारण लोगों का जीवन कठिन हो गया है। तीन साल के कार्यकाल में सरपंच से गांववालों को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन अब लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। बाबूपुर पंचायत का हाल देखकर साफ है कि विकास केवल नारों और दावों में रह गया है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
