विश्व | भारत ने पाकिस्तान को तवी नदी में संभावित बाढ़ के बारे में आगाह किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पाकिस्तान से संपर्क कर इस स्थिति की जानकारी साझा की है। हालांकि, भारत या पाकिस्तान की ओर से इस घटनाक्रम की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। आमतौर पर ऐसी जानकारी सिंधु जल आयुक्त के माध्यम से साझा की जाती है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि जम्मू में तवी नदी में संभावित भीषण बाढ़ को लेकर पाकिस्तान को चेतावनी दी गई है।
भारत ने पाकिस्तान को तवी नदी में संभावित बाढ़ को लेकर सचेत किया है। नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी को लेकर दोनों देशों के बीच समय पर जानकारी साझा की गई ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके और आवश्यक सतर्कता बरती जा सके।
पाकिस्तान में बाढ़ का खतरा
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि 1960 से लागू है, जो सिंधु और उसकी सहायक नदियों के जल के बंटवारे और उपयोग को नियंत्रित करती है। इसी बीच, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने पाकिस्तान के अधिकांश हिस्सों में 30 अगस्त तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। देश मानसून की तेज बारिश से प्रभावित है, जिसमें अब तक 788 से अधिक लोग मारे गए और 1,018 लोग घायल हुए हैं।
सिंधु जल संधि
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि 1960 में लागू की गई थी, जिसके तहत सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी का बंटवारा और उपयोग दोनों देशों के बीच तय किया गया। इस संधि के तहत भारत को पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) और पाकिस्तान को पूर्वी नदियों (सातलज, व्यास और रावी) का प्रबंधन करने का अधिकार दिया गया है। हाल ही में, पाकिस्तान के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है और भारत ने संभावित बाढ़ की जानकारी साझा करते हुए पाकिस्तान को सचेत किया है। यह कदम दोनों देशों के बीच जल संसाधनों के सुरक्षित और समन्वित उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
भारत-पाक रिश्तों में तनाव जारी
इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग ने रविवार को चेतावनी जारी की है। खबरों के अनुसार, यह मई में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच पहला बड़ा संपर्क है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारत द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर यह चेतावनी दी। उल्लेखनीय है कि पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के एक दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक कदम उठाए थे, जिनमें 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित करना भी शामिल था।
