मैहर | पीएम श्री कन्या शाला मैहर में नियम विरुद्ध तरीके से चपरासी द्वारा ऑपरेटर की जिम्मेदारी संभालने का मामला लगातार चर्चा में है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिला कलेक्टर को इस विषय पर शिकायत पत्र सौंपे जाने के बाद भी प्रशासनिक अमले की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। छात्राओं और अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही और जिला शिक्षा विभाग की चुप्पी से चपरासी पूरे सिस्टम पर हावी हो चुका है।
शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित
सूत्रों के मुताबिक, विद्यालय का यह चपरासी न केवल ऑपरेटर की कुर्सी पर बैठकर स्कूल के कंप्यूटर सिस्टम को चलाता है, बल्कि उसने लैब रूम को ही अपना स्थायी निवास बना लिया है। आरोप है कि लैब रूम में उसने अपने रहने का पूरा इंतजाम कर रखा है और वहां की बिजली-पानी सहित तमाम सुविधाओं का खर्च सरकारी खजाने से उठाया जा रहा है या नहीं, यह जांच का विषय है। छात्राओं का कहना है कि इस नियम विरुद्ध गतिविधि से न केवल विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हुई है, बल्कि सफाई और अनुशासन जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं भी बिगड़ चुकी हैं।
गंभीर आरोप
छात्राओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जब से यह चपरासी ऑपरेटर की भूमिका निभा रहा है, तब से स्कूल की दुर्दशा बढ़ गई है। न तो परिसर में साफ-सफाई रहती है और न ही चपरासी अपने वास्तविक कार्यों को नियमानुसार करता है। छात्राओं का कहना है कि उनकी पढ़ाई और अनुशासन दोनों प्रभावित हो रहे हैं, परंतु उनकी शिकायतें अनसुनी कर दी जाती हैं।
प्रश्न उठना स्वाभाविक
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि जब प्रदेश सरकार शिक्षा सुधार को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, तब मैहर जैसे महत्वपूर्ण शिक्षा संस्थान में इस तरह की अव्यवस्था क्यों बरकरार है? जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की चुप्पी से यह संदेश जा रहा है कि चपरासी का दबदबा इतना अधिक है कि कोई भी अधिकारी उस पर कार्रवाई करने से कतराता है। अब सभी की नजरें जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर पर टिकी हैं कि वे छात्राओं की पुकार को कितनी गंभीरता से लेते हैं।
