भोपाल | खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले शूटरों के शस्त्र लाइसेंस और एम्युनेशन की सघन जांच का काम भोपाल में जारी है। जिला मजिस्ट्रेट भोपाल कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच दल ने 25 और 26 अगस्त को शूटरों को अपने मूल शस्त्र लाइसेंस, हथियार और कारतूस के दस्तावेजों के साथ बुलाया। इस दौरान 14 शूटरों की जांच 25 अगस्त को और 18 शूटरों की जांच 26 अगस्त को की गई। शेष शूटरों को आगामी कार्य दिवसों में बुलाया जाएगा।
लाइसेंस आत्मरक्षार्थ
जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। पाया गया कि कुछ शूटरों के पास मूल लाइसेंस आत्मरक्षार्थ जारी हुआ था, लेकिन बाद में उन्होंने उसी लाइसेंस पर खेल श्रेणी में अतिरिक्त शस्त्र प्राप्त कर लिए। ऐसे मामलों में शूटरों के पास 4 तक हथियार पाए गए, जबकि उनका मूल उद्देश्य केवल आत्मरक्षा था। इसके साथ ही, खेल श्रेणी में मिलने वाले एम्युनेशन के कोटे का उपयोग आत्मरक्षा के लिए किया जा रहा है।
रिकॉर्ड संदिग्ध
जांच में यह भी सामने आया कि कई शूटर लंबे समय से किसी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले रहे हैं, फिर भी उन्होंने खेल श्रेणी के अंतर्गत शस्त्र और कारतूस अपने पास रखे हुए हैं। कुछ शूटरों ने प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया, लेकिन अपने लाइसेंस पर कारतूस की खरीद का उल्लेख नहीं किया। ऐसे मामलों में एम्युनेशन की खपत और उसका रिकॉर्ड संदिग्ध पाया गया।
संयुक्त जांच दल ने शूटरों से पिछले 10 वर्षों के अभ्यास और प्रतियोगिताओं में उपयोग किए गए कारतूसों का पूरा ब्यौरा भी मांगा। साथ ही, उनसे यह जानकारी भी ली गई कि उन्होंने कब और किन स्रोतों से कारतूस खरीदे तथा कितने खोखे नेशनल रायफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया और वैध शस्त्र डीलरों को लौटाए।
अंतिम रिपोर्ट
इसी क्रम में 19 अगस्त को भोपाल के थाना परवलिया क्षेत्र स्थित रसूलिया पठार पर एक अवैध शूटिंग रेंज में फायरिंग की जानकारी सामने आने पर पुलिस अधीक्षक देहात को प्रकरण दर्ज करने के लिए लिखा गया था। इस पर थाना परवलिया पुलिस ने आरोपी शारीक बुखारी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की है।
जांच के दौरान शस्त्र डीलरों में भी अनियमितताएं मिलीं। शाह आर्मरी की दुकान पर गड़बड़ियां पाई जाने के बाद उसके आर्म्स डीलर लाइसेंस को निरस्त करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। संयुक्त जांच दल आने वाले दिनों में शेष शूटरों को बुलाकर हथियार और एम्युनेशन का भौतिक सत्यापन करेगा। जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी।
