भोपाल | मप्र की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने बुधवार को बड़ा हमला बोला। कांग्रेसी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश के 13 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में फैकल्टी ही नहीं है। कई कॉलेज ऐसे हैं जहां पूरा सिस्टम सिर्फ एक फैकल्टी के भरोसे चल रहा है।
कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. मुकेश नायक ने कहा कि यह शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है। अगर सरकार चाहती है कि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनी रहे, तो उसे तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे।
माफिया चला रहे शिक्षा व्यवस्था: विवेक त्रिपाठी
कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था माफियाओं के हाथों में है। सरकार की मौन स्वीकृति से छात्रों को निजी कॉलेजों में दुगनी-तिगुनी फीस भरने को मजबूर किया जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज घोटाले की दो बार सीबीआई जांच हो चुकी है, लेकिन गड़बड़ियां जस की तस हैं।
3 कॉलेज सिर्फ 1 फैकल्टी के भरोसे
एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने बताया कि 13 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में फैकल्टी की भारी कमी है। 3 कॉलेजों में सिर्फ 1-1 फैकल्टी ही पूरी व्यवस्था संभाल रही है। यह छात्रों के भविष्य और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा खतरा है।
जुलानिया समिति की रिपोर्ट पर सवाल
रवि परमार ने कहा कि हाईकोर्ट की जुलानिया समिति ने कई कॉलेजों को ‘सूटेबल’ घोषित कर दिया, जबकि वहां गंभीर कमियां थीं। उन्होंने मांग की कि समिति की रिपोर्ट और सभी दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जाए।
NSUI का आरोप
एनएसयूआई जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि NSUI लगातार आवाज उठा रही है, लेकिन भाजपा सरकार दोषियों पर कार्रवाई करने की बजाय उन्हें बचा रही है। यही वजह है कि प्रदेश की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था चौपट हो रही है।
कांग्रेस की मांगें
- संदिग्ध नियुक्तियों और फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों की स्वतंत्र जांच।
- जिन कॉलेजों में फैकल्टी की कमी है, वहां तत्काल नियुक्ति।
- जुलानिया समिति की रिपोर्ट की फॉरेंसिक जांच।
- दोषी अधिकारियों और फैकल्टी पर कार्रवाई।
- छात्रों के हित में वैकल्पिक व्यवस्था लागू करना।
- राजधानी और जिलों के कॉलेजों की हकीकत
कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए तो सत्र 2025-26 में इन 13 कॉलेजों की मान्यता ही खतरे में पड़ जाएगी।
| संस्थान / स्थान | स्थिति |
| बीएमएचआरसी, भोपाल | प्राचार्य नहीं, फैकल्टी अनुभव संदिग्ध |
| पं. खुशीलाल शर्मा संस्थान, भोपाल | प्राचार्य नहीं, नियुक्तियों में नियम तोड़े गए |
| अमरकंटक | सिर्फ 1 फैकल्टी |
| उज्जैन | सिर्फ 1 फैकल्टी |
| जबलपुर | पूरे कॉलेज में सिर्फ 2 फैकल्टी |
| मंदसौर | 60 सीटों पर सिर्फ 5 फैकल्टी |
| नरसिंहपुर, रायसेन, सीधी, झाबुआ, राजगढ़ | प्राचार्य और प्रोफेसर तक नहीं |
| सागर | 35 सीटों का आवेदन, लेकिन प्रमुख अनुपस्थित |
