भोपाल | खेलों को बढ़ावा देने और युवाओं में प्रतिस्पर्धा की भावना जगाने के उद्देश्य से इस वर्ष सांसद खेल महोत्सव 2025 का आयोजन बड़े स्तर पर किया जाएगा। महोत्सव का शुभारंभ 29 अगस्त, राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर, खिलाड़ियों के पंजीकरण से होगा। पंजीकरण की अंतिम तिथि 20 सितंबर तय की गई है। इसके बाद 21 सितंबर से लेकर 25 दिसंबर तक ग्राम, ब्लॉक और जिला स्तर पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
भोपाल में हुई तैयारी बैठक
भोपाल के कलेक्टर कार्यालय सभाकक्ष में सांसद आलोक शर्मा की अध्यक्षता में महोत्सव की तैयारियों को लेकर बैठक संपन्न हुई। बैठक में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, नगर निगम आयुक्त हरेंद्र नारायण, सीईओ स्मार्ट सिटी अंजू अरुण कुमार और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं, बल्कि ग्राम स्तर से लेकर जिला स्तर तक छिपी प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें आगे बढ़ाने का अवसर देना है।
पंजीकरण और प्रतियोगिता का स्वरूप
- पंजीकरण तिथि : 29 अगस्त से 20 सितंबर 2025 तक
- प्रतियोगिता अवधि : 21 सितंबर से 25 दिसंबर 2025 तक
- स्तर : ग्राम, ब्लॉक और जिला
इस अवधि में फुटबॉल, कबड्डी, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स, क्रिकेट, खो-खो सहित कई पारंपरिक और आधुनिक खेलों की प्रतियोगिताएं होंगी।
युवाओं को मिलेगा मंच
महोत्सव से युवाओं को ग्रामीण स्तर पर ही खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही, चयनित खिलाड़ियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में आगे बढ़ने का मौका भी दिया जाएगा। सांसद आलोक शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रतियोगिता पारदर्शी ढंग से और अधिक से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी सुनिश्चित कराई जाए।
‘खेलो इंडिया’ की तर्ज पर पहल
- खेलों में बुनियादी ढांचा मजबूत करना
- खिलाड़ियों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण व प्रतियोगिता उपलब्ध कराना
- ग्रामीण प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करना
खेल और समाज
खेल किसी भी समाज की ऊर्जा, अनुशासन और एकजुटता को दर्शाते हैं। आज के समय में जब युवा वर्ग मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में अधिक व्यस्त होता जा रहा है, ऐसे में खेल महोत्सव उन्हें मैदान से जोड़ने का मजबूत जरिया बन सकते हैं। भारत में खेलों की परंपरा बहुत पुरानी है। गाँवों में कबड्डी, खो-खो, कुश्ती, गिल्ली-डंडा और क्रिकेट जैसे खेल सामाजिक मेलजोल और भाईचारे के प्रतीक रहे हैं। वहीं एथलेटिक्स, वॉलीबॉल और फुटबॉल जैसे खेल युवा खिलाड़ियों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होते हैं।
सांसद खेल महोत्सव जैसे आयोजन युवाओं को न केवल प्रतिस्पर्धा की भावना सिखाते हैं, बल्कि उन्हें जीत और हार दोनों को स्वीकार करना भी सिखाते हैं। इसके साथ ही, ये आयोजन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की खाई को कम करते हैं क्योंकि मैदान में सभी खिलाड़ी समान अवसर के साथ उतरते हैं। इसके अलावा, खेलों के माध्यम से रोजगार और करियर की संभावनाएं भी खुलती हैं। कई खिलाड़ी, जो छोटे गाँवों से निकलकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं, इसी तरह के आयोजनों से पहचाने गए थे।
युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देने और समाज को स्वस्थ व जागरूक बनाने के लिए खेल महोत्सव बेहद ज़रूरी हैं। आने वाले वर्षों में यदि ऐसे कार्यक्रम लगातार होते रहे तो न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश को प्रतिभाशाली खिलाड़ी मिलेंगे।
