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MPCA अध्यक्ष बने महानआर्यमन सिंधिया, निर्विरोध चुनाव के साथ तीसरी पीढ़ी की एंट्री

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Published On: 2 September 2025

मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) में मंगलवार को नया अध्याय जुड़ गया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महानआर्यमन सिंधिया निर्विरोध अध्यक्ष चुन लिए गए। पूरी कार्यकारिणी भी बिना मुकाबले बनी। 29 साल की उम्र में महानआर्यमन इस पद पर पहुंचने वाले सबसे युवा अध्यक्ष हैं।

क्रिकेट में नई जिम्मेदारी

एजीएम में निर्विरोध चुने जाने के बाद महानआर्यमन ने कहा कि उनका लक्ष्य एमपीसीए को देश की नंबर वन क्रिकेट संस्था बनाना है। उन्होंने कहा कि हम ग्रामीण स्तर पर क्रिकेट को बढ़ावा देंगे, महिलाओं को ज्यादा मौके देंगे और टेक्नोलॉजी का उपयोग कर खिलाड़ियों की स्किल विकसित करेंगे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अनुभव भले ही कम है, लेकिन उनके साथ अनुभवी टीम है।

महानआर्यमन के मुताबिक, इंदौर में होने जा रहे विमेंस वर्ल्ड कप के पांच मैच यह साबित करते हैं कि एमपीसीए पर आईसीसी और बीसीसीआई को भरोसा है। वे आने वाले समय में जिला और संभाग स्तर पर क्रिकेट की समीक्षा करेंगे और मैदान पर जाकर खिलाड़ियों से जुड़ेंगे।

क्रिकेट से जुड़ाव

महानआर्यमन पिछले 3 साल से क्रिकेट मैनेजमेंट में सक्रिय हैं। 2022 में उन्हें ग्वालियर डिविजनल क्रिकेट एसोसिएशन का उपाध्यक्ष बनाया गया और एमपीसीए का आजीवन सदस्य भी बनाया गया। इसके बाद उन्होंने मध्यप्रदेश प्रीमियर लीग की शुरुआत की, जिसका ग्वालियर में लगातार सफल आयोजन हो रहा है। इस लीग को आईपीएल की तर्ज पर स्थानीय स्तर पर खास पहचान मिली है।

सिंधिया परिवार

सिंधिया परिवार का क्रिकेट से जुड़ाव पुराना है। माधवराव सिंधिया इंग्लैंड में पढ़ाई के दौरान क्रिकेट खेलते रहे और भारत लौटकर ग्वालियर टाइगर्स टीम बनाई। उनके सहयोग से 1969-70 में ऑल इंडिया सिंधिया इन्विटेशन कप टूर्नामेंट शुरू हुआ। इसमें देश के कई बड़े खिलाड़ी हिस्सा लेते थे।

1982 में माधवराव सिंधिया एमपीसीए अध्यक्ष बने और बाद में बीसीसीआई अध्यक्ष भी रहे। इसके बाद 2004 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एमपीसीए की कमान संभाली और 2012 तक पद पर बने रहे। इस दौरान उन्होंने दो बार कैलाश विजयवर्गीय को हराकर अपनी पकड़ मजबूत रखी।

अब महानआर्यमन निर्विरोध चुने गए हैं। जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीति में उनकी संभावित एंट्री की तैयारी भी हो सकती है। परिवार की पिछली दो पीढ़ियों ने भी सार्वजनिक जीवन की शुरुआत इसी तरह संस्थागत जिम्मेदारियों से की थी।

निर्विरोध चुनाव

एमपीसीए अध्यक्ष पद के लिए इस बार किसी और ने नामांकन नहीं भरा। ऐसे में महानआर्यमन का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया। मौजूदा अध्यक्ष अभिलाष खांडेकर का कहना है कि सर्वसम्मति से चुनाव होना संस्था के लिए अच्छा है। अगर दो पैनल बनकर मुकाबला करें तो नुकसान क्रिकेट को होता है।

नई कार्यकारिणी अगले तीन साल के लिए जिम्मेदारी संभालेगी। निर्विरोध जीत से यह भी संदेश गया है कि एमपीसीए आंतरिक खींचतान से बचकर क्रिकेट के विकास पर ध्यान देना चाहता है।

आगे की चुनौतियां

महानआर्यमन की सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीण इलाकों तक क्रिकेट पहुंचाना और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर देना है। महिला क्रिकेट को बढ़ावा देना और टेक्नोलॉजी के जरिए ट्रेनिंग सिस्टम मजबूत करना भी उनकी प्राथमिकता रहेगी। अब सबकी निगाहें इस पर होंगी कि युवा नेतृत्व एमपीसीए को किस तरह नई ऊंचाई पर ले जाता है।

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