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पन्ना कांड: बाल कल्याण समिति के फैसले ने नाबालिग को दोबारा रेप का शिकार बना दिया

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Published On: 3 September 2025

मध्यप्रदेश के पन्ना में बाल कल्याण समिति (CWC) की शर्मनाक लापरवाही सामने आई है। समिति ने रेप पीड़िता नाबालिग को उसी आरोपी के घर भेज दिया, जिसने पहले उसके साथ दुष्कर्म किया था। नतीजा लड़की से दोबारा रेप हुआ।

CWC का ‘कातिल’ फैसला

16 जनवरी को 15 साल की नाबालिग लापता हुई। 17 फरवरी को गुरुग्राम से बरामद कर आरोपी को जेल भेजा गया। लेकिन 29 मार्च को CWC ने चौंकाने वाला फैसला लिया और पीड़िता को आरोपी की भाभी (जो पीड़िता की चचेरी बहन है) के सुपुर्द कर दिया। इसी फैसले ने आरोपी को जमानत का फायदा दिलाया और बाहर आते ही उसने लड़की को फिर से शिकार बना लिया। यह सीधा-सीधा CWC का अपराध है।

पुलिस का एक्शन

मामला सामने आने पर छतरपुर पुलिस ने CWC अध्यक्ष और सदस्यों पर FIR दर्ज की। पुलिस ने घरों पर दबिश दी और समिति सदस्य आशीष बॉस को गिरफ्तार कर लिया। बाकी आरोपी फरार हैं।

एसडीओपी नवीन दुबे का कहना है, “CWC और संबंधित अधिकारियों के गलत फैसले की वजह से पीड़िता दोबारा दुष्कर्म की शिकार हुई।”

FIR किन पर?

CWC अध्यक्ष भानू जड़िया और सदस्य अंजलि भदौरिया, आशीष बॉस, सुदीप श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार सिंह-POCSO धारा 17 (अपराध को बढ़ावा देने)।

वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक, काउंसलर, केस वर्कर-POCSO धारा 21 (घटना दबाने पर)।

महिला एवं बाल विकास अधिकारी अवधेश सिंह-POCSO धारा 21, SC-ST एक्ट और BNS की धाराएं।

अंजलि कुशवाहा-किशोर न्याय अधिनियम धारा 82।

काउंसलिंग में खुला राज

29 अप्रैल को लड़की को फिर वन स्टॉप सेंटर भेजा गया। काउंसलिंग के दौरान उसने खुलासा किया कि आरोपी ने कई बार फिर से रेप किया। इसके बाद CWC और अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई।

जिम्मेदारी CWC की

यह मामला साफ करता है कि प्रशासन की सबसे बड़ी गलती CWC का गैरजिम्मेदाराना और अपराधी जैसा फैसला था। जिन पर नाबालिग की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वहीं उसे दरिंदे के घर भेजकर हैवानियत दोहराने का रास्ता खोल गए।

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