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भोपाल में ABVP का आंदोलन, मछली कांड पर प्रशासन को पड़ा झुकना; दोषियों पर कार्रवाई शुरू

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Published On: 5 September 2025

राजधानी भोपाल में छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर चले लंबे संघर्ष में आखिरकार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने बड़ी जीत हासिल की है। बहुचर्चित मछली कांड प्रकरण, जिसमें छात्राओं के साथ छेड़छाड़, ड्रग्स, लव जिहाद और असामाजिक गतिविधियों के आरोप लगे थे, उस मामले में अब प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी है। एबीवीपी ने इसे अपनी निर्णायक विजय करार दिया है।

आंदोलन की शुरुआत

25 अप्रैल 2025 को रायसेन रोड स्थित एक निजी कॉलेज की छात्राओं के साथ हुई घटना ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। इसके बाद, एबीवीपी ने स्पष्ट कर दिया था कि बेटियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा, दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी होगी। इसी मांग को लेकर परिषद ने आंदोलन छेड़ दिया।

29 अप्रैल को कलेक्टर कार्यालय का घेराव करते हुए एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की “बेटियों की सुरक्षा दो, अपराधियों को सजा दो। यह प्रदर्शन धीरे-धीरे बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका था।

परिषद की मांगें

एबीवीपी ने आंदोलन के दौरान कई अहम मांगें रखीं। इसमें दोषियों पर IPC, POCSO और IT एक्ट की धाराओं में सख्त कार्रवाई, कॉलेज परिसरों में ड्रग्स और लव जिहाद रोकने के लिए विशेष पुलिस टीम, कन्या महाविद्यालयों के पास शराब की दुकानों को हटाना और छात्राओं की सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी व Internal Complaints Committee गठित करने की मांग शामिल थी। परिषद ने पूरे प्रदेश में सुरक्षा और जागरूकता कार्यक्रम लागू करने की भी बात कही।

दबाव में आया प्रशासन

लगातार 34 दिन तक आंदोलन चलता रहा। एबीवीपी ने FIR दर्ज न होने पर इसे प्रशासन की नाकामी बताया और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग और तेज कर दी। आंदोलन का असर इतना हुआ कि प्रशासन को मामले की जानकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक भेजनी पड़ी।

एबीवीपी की जीत

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई सिर्फ मछली कांड तक सीमित नहीं है। यह पूरे प्रदेश की बेटियों की सुरक्षा का सवाल है। परिषद ने कहा कि यह आंदोलन साबित करता है कि जब बात छात्राओं की सुरक्षा की हो, तो एबीवीपी किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

परिषद का कहना है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। जब तक छात्राओं को शिक्षा संस्थानों में पूरी सुरक्षा और भरोसे का माहौल नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

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