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इंदौर महापौर के बेटे का भाषण बना चर्चा का विषय, कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने दिया समर्थन

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Published On: 6 September 2025

इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव के बेटे संघमित्र भार्गव का वाद-विवाद प्रतियोगिता में दिया गया भाषण इन दिनों सियासी चर्चा का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को लेकर अब कांग्रेस सांसद और पूर्व महाधिवक्ता विवेक तन्खा भी संघमित्र के समर्थन में सामने आए हैं।

सोशल मीडियो पर दी प्रतिक्रिया

विवेक तन्खा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वाद-विवाद प्रतियोगिता छात्रों की प्रतिभा और तर्कशक्ति का मंच होती है। इसमें कोई पक्ष में बोलता है तो कोई विपक्ष की भूमिका निभाता है। संघमित्र ने विपक्ष का पक्ष लिया और अपनी वक्तृत्व कला का परिचय दिया। तन्खा ने अफसोस जताया कि एक छात्र की कला को राजनीतिक चश्मे से देखा गया और उसे ट्रोल किया गया। उन्होंने कहा कि यह न केवल बच्चों के आत्मविश्वास को तोड़ने की कोशिश है, बल्कि समाज की सोच पर भी सवाल उठाता है।

तन्खा ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संघमित्र की प्रतिभा की सराहना कर सकारात्मक संदेश दिया। इससे साफ है कि सच्ची प्रतिभा को राजनीति के तराजू में नहीं तोला जाना चाहिए। तन्खा ने अपील की कि युवाओं का मनोबल गिराने की बजाय बढ़ाना चाहिए।

इन्होंने कही ये बातें

  • संघमित्र के भाषण की तारीफ तन्खा से पहले कई बड़े नेताओं ने भी की थी। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर संघमित्र का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि वे प्रभावशाली वक्ता हैं। बाद में मीडिया से बातचीत में दिग्विजय ने कहा कि संघमित्र ने तथ्यों के साथ अपनी बात रखी और वह उनसे सहमत भी हैं।
  • इधर, भाजपा के कद्दावर नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी संघमित्र के समर्थन में लंबा पोस्ट लिखा। उन्होंने कहा कि वाद-विवाद प्रतियोगिता का मकसद ही यही होता है कि कोई पक्ष में बोले और कोई विपक्ष में। संघमित्र ने विपक्ष की भूमिका निभाई और यह कला की अभिव्यक्ति है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे रंगमंच पर कोई कलाकार नायक और खलनायक दोनों की भूमिका निभा सकता है, वैसे ही संघमित्र का भाषण भी उसी कला का हिस्सा है।
  • विजयवर्गीय ने अपने पोस्ट में फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा का जिक्र करते हुए कहा कि वे इंदौर में होने वाले “हमारे राम” नाटक में रावण की भूमिका निभा रहे हैं, तो क्या इसका मतलब यह है कि वे सचमुच रावण हो गए? बिल्कुल नहीं। उन्होंने इसे कला की अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि सिर्फ इसलिए संघमित्र को ट्रोल करना कि वे महापौर के बेटे हैं, यह निंदनीय और अनुचित है।
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