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भोपाल में मकान मालिक, होटल और ठेकेदारों पर नई जिम्मेदारी; ब्योरा पुलिस को देना अनिवार्य

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Published On: 8 September 2025

राजधानी भोपाल में अब किरायेदारों, पेइंग गेस्ट, होटल-लॉज के मेहमानों और मजदूरों की पूरी जानकारी पुलिस को देना जरूरी कर दिया गया है। पुलिस आयुक्त हरिनारायणचारी मिश्र ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक, शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए हर नागरिक और संस्थान को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

मकान मालिकों के लिए सख्त नियम

अब कोई भी मकान मालिक अगर अपना घर या उसका हिस्सा किराये पर देता है तो उसे एक हफ्ते के अंदर किरायेदार या पेइंग गेस्ट का ब्योरा भरकर थाने में जमा करना होगा। यह जानकारी मध्यप्रदेश पुलिस सिटिजन पोर्टल पर भी दी जा सकती है। जिन मकानों में पहले से किरायेदार या नौकर रह रहे हैं, उनके बारे में भी जानकारी 15 दिन के भीतर पुलिस को देना अनिवार्य होगा।

धर्मशालाओं पर कड़ी निगरानी

शहर के सभी होटल, लॉज, धर्मशाला और रिसॉर्ट मालिकों को निर्देश दिए गए हैं कि उनके यहां ठहरने वाले हर मेहमान का पूरा विवरण रजिस्टर में दर्ज करें। साथ ही यह जानकारी स्थानीय थाने को भी निर्धारित प्रारूप में देना होगा। यानी अब कोई भी व्यक्ति बिना पहचान बताए कहीं भी ठहर नहीं सकेगा।

छात्रावास और ठेकेदार भी आए दायरे में

पुलिस ने आदेश में साफ कहा है कि सभी छात्रावास संचालक अपने यहां रहने वाले छात्र-छात्राओं का ब्योरा पुलिस को सौंपें। वहीं, जो ठेकेदार या बिल्डर मजदूरों को काम पर रखते हैं, उन्हें भी हर मजदूर और कारीगर की जानकारी तय प्रारूप में थाने में देनी होगी।

स्पा सेंटरों के लिए गाइडलाइन

ट्रेवल एजेंसी अब किसी को भी गाड़ी किराये पर देने से पहले उसकी पहचान की जांच करेंगी और पहचान पत्र की कॉपी अपने पास रखनी होगी। इसी तरह, स्पा सेंटर, मसाज पार्लर और ब्यूटी पार्लर में काम करने वाले लोगों का विवरण और उनका आईडी प्रूफ पुलिस को देना होगा।

जो भी प्राइवेट सुरक्षा एजेंसियां गार्ड नियुक्त करती हैं, उन्हें गार्ड की जानकारी और आईडी प्रूफ पुलिस को सौंपना होगा। यहां तक कि ऑनलाइन शॉपिंग, फूड डिलीवरी या कुरियर कंपनियों के लिए काम करने वाले डिलीवरी बॉयज़ का भी ब्योरा देना अनिवार्य कर दिया गया है। यानी जो भी व्यक्ति घर-घर सामान पहुंचाते हैं, उनकी पहचान से जुड़ी जानकारी पुलिस रिकॉर्ड में रहेगी।

आदेश दो महीने तक रहेगा लागू

यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी होने की तारीख से दो महीने तक प्रभावी रहेगा। पुलिस आयुक्त ने साफ किया है कि यह कदम शहर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। इससे संदिग्ध लोगों और अवैध गतिविधियों पर काबू पाया जा सकेगा।

सुरक्षा और जिम्मेदारी दोनों

पुलिस का मानना है कि अक्सर अपराधियों या संदिग्ध लोगों के छिपने की जगह यही किराये के मकान, लॉज या छात्रावास बन जाते हैं। कई बार मजदूरों या डिलीवरी बॉय के रूप में नकली पहचान वाले लोग अपराध को अंजाम देते हैं। अब हर संस्था और नागरिक की जिम्मेदारी है कि वे जानकारी सही-सही देकर पुलिस की मदद करें।

इस आदेश से शहर के हर मकान मालिक, होटल संचालक, छात्रावास प्रबंधक, ठेकेदार, ट्रेवल एजेंसी, स्पा-सैलून मालिक और सुरक्षा एजेंसियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई है। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि आदेश का पालन न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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