भोपाल की जिला अदालत परिसर में शनिवार को तीसरी नेशनल लोक अदालत और रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस मौके पर न्यायाधीशों, अधिकारियों और अधिवक्ताओं की मौजूदगी में कई महत्वपूर्ण फैसले हुए और हजारों लोगों को राहत मिली।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर की। इसके बाद रक्तदान शिविर का उद्घाटन किया गया। खास बात यह रही कि न्यायाधीश श्रीवास्तव ने खुद सबसे पहले रक्तदान कर लोगों को प्रेरित किया। इस शिविर का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला बार एसोसिएशन और शासकीय अस्पतालों के सहयोग से हुआ। वकीलों और आम नागरिकों ने भी उत्साह से रक्तदान किया।
19526 मामलों का निपटारा
इस लोक अदालत में कुल 63 खंडपीठ बनाई गईं। इनमें 19,526 मामलों का निपटारा हुआ। इनमें से 3,650 पुराने लंबित और 15,876 प्री-लिटिगेशन मामले थे। अदालत ने कुल 54 करोड़ 62 लाख 25 हजार रुपये से अधिक का अवार्ड पारित किया।
चेक बाउंस से जुड़े 647, मोटर दुर्घटना दावे से 669, पारिवारिक विवादों से 150 और बैंक रिकवरी के 370 मामलों समेत कई तरह के विवाद इस एक दिन में सुलझा दिए गए।
सफल समझौते की कहानियां
लोक अदालत की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि कई सालों से चले आ रहे विवाद आपसी राजीनामे से खत्म हुए। मोटर दुर्घटना दावे के एक मामले में 44 लाख रुपये और दूसरे में 29 लाख रुपये का मुआवजा तय हुआ। अदालत ने संबंधित पक्षों को चेक सौंपे और मौके पर ही समाधान कर दिया।
भरण-पोषण से जुड़े विवादों में भी समझौते हुए। यहां तक कि कुछ पक्षकारों ने अदालत में एक-दूसरे को फूलमाला पहनाकर अपने मतभेद खत्म किए। न्यायाधीशों ने इन्हें फलदार पौधे भेंट कर नई शुरुआत की शुभकामनाएं दीं।
