भोपाल में बने कोलार सिक्सलेन का मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) तक जा पहुंचा है। करीब 305 करोड़ रुपए की लागत से बने इस 14.2 किलोमीटर लंबे सिक्सलेन प्रोजेक्ट में 4105 पेड़ काटे गए हैं। इस पर आपत्ति जताते हुए एनजीटी ने अगले दो हफ्ते में पूरी रिपोर्ट मांगी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को होगी।
मामला एक याचिका के जरिए एनजीटी में पहुंचा। याचिकाकर्ता का कहना है कि पेड़ काटने की अनुमति अवैध तरीके से दी गई है। उन्होंने तर्क दिया कि हॉर्टिकल्चर असिस्टेंट कमिश्नर के नाम पर जो आदेश जारी हुआ है, वह कानूनी तौर पर मान्य नहीं है। दरअसल, भोपाल नगर निगम का कहना है कि असिस्टेंट कमिश्नर ने केवल आदेश को संप्रेषित किया था, जबकि असली अनुमति ट्री ऑफिसर ने दी थी। लेकिन इस अनुमति का कोई साफ रिकॉर्ड नहीं मिला।
पहले ही कट चुके हैं पेड़
इस सुनवाई में लोक निर्माण विभाग (PWD) ने साफ स्वीकार किया कि सड़क का काम पूरा हो चुका है। यानी बड़ी संख्या में पेड़ पहले ही काट दिए गए हैं। अब सवाल यह है कि क्या इन पेड़ों के बदले प्रतिपूरक पौधारोपण किया गया है या नहीं।
NGT ने मांगी पूरी रिपोर्ट
एनजीटी ने सभी संबंधित विभागों से कहा है कि वे दो हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। इसमें ट्री ऑफिसर की अनुमति की कॉपी, प्रतिपूरक पौधारोपण के लिए जमा की गई राशि, अब तक लगाए गए पौधों की संख्या और कितने पेड़ वास्तव में बचे हैं—इन सबकी जानकारी देनी होगी।
पुराने आदेश का उल्लंघन?
यह मामला इसलिए और गंभीर हो गया है क्योंकि एनजीटी ने पहले ही 9 जनवरी 2025 को आदेश दिया था कि बिना कानूनी प्रक्रिया के कोई भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। अब सवाल यह है कि 4105 पेड़ों की कटाई कहीं उस आदेश का सीधा उल्लंघन तो नहीं है।
राहत
कोलार सिक्सलेन बनने के बाद इलाके की बड़ी आबादी को ट्रैफिक जाम से काफी राहत मिली है। लोग अब आसानी से आवाजाही कर पा रहे हैं। लेकिन पर्यावरणविदों और याचिकाकर्ता का कहना है कि इसकी कीमत हजारों पेड़ों को काटकर चुकानी पड़ी, जो लंबे समय में शहर की हवा और हरियाली पर असर डालेगा।
