सतना में आदिम जाति कल्याण विभाग (जनजातीय कल्याण विभाग) के जिला संयोजक अरुण शुक्ला पर गंभीर आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि छात्रावासों में निरीक्षण के बहाने अधीक्षकों पर दबाव बनाकर उनसे वसूली की जा रही है। इस मामले ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, रविवार को छुट्टी के दिन अरुण शुक्ला अचानक अमरपाटन क्षेत्र के छात्रावासों के निरीक्षण पर पहुंचे। वहां अधीक्षकों पर कई तरह के आरोप लगाते हुए उन्होंने निलंबन, नौकरी से निकालने और वेतन रोकने जैसी धमकियाँ दीं। इससे अधीक्षक भयभीत हो गए और उन पर मनमानी का दबाव डाला गया।
सतना कार्यालय में डील
सूत्रों का कहना है कि अगले ही दिन सोमवार को अधीक्षकों को सतना कार्यालय बुलाया गया। यहां उनसे कथित रूप से 50-50 हजार रुपए की वसूली की गई। यह रकम अरुण शुक्ला द्वारा सुझाए गए व्यक्ति के माध्यम से ली गई।
नया ड्राइवर बना मिश्रा बाबू
चर्चा है कि अरुण शुक्ला का नया ड्राइवर “मिश्रा बाबू” इन लेन-देन का मुख्य माध्यम बना हुआ है। बताया जाता है कि मिश्रा बाबू के जरिए ही पैसों का लेनदेन होता है, जिससे उसे भी अतिरिक्त कमाई हो रही है। सूत्रों का कहना है कि अरुण शुक्ला ने ड्राइवर का पद केवल लेनदेन को सुरक्षित तरीके से संचालित करने के लिए दिलवाया है।
अधीक्षकों में आक्रोश
विभाग के कई अधीक्षकों ने अरुण शुक्ला की मनमानी और अवैध वसूली को लेकर असंतोष जताया है। सूत्र बताते हैं कि कुछ अधीक्षकों ने इसकी शिकायत एक बड़े राजनीतिक नेता से भी की है। हालांकि, अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक कार्रवाई सामने नहीं आई है।
लगातार सुर्खियों में कारनामे
अरुण शुक्ला के कारनामे हाल के दिनों में लगातार सुर्खियों में रहे हैं। निरीक्षण के नाम पर अधीक्षकों को डराना और वसूली करना, विभागीय छवि को धूमिल कर रहा है। अब देखना होगा कि इस मामले पर उच्च अधिकारी और सरकार क्या रुख अपनाते हैं।
