नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने मध्यप्रदेश में मेलियोइडोसिस को लेकर अलर्ट जारी किया है। यह संक्रामक बीमारी मिट्टी और पानी में पाए जाने वाले बर्कहोल्डेरिया स्यूडोमेलाई बैक्टीरिया से फैलती है। बरसात और नमी के मौसम में संक्रमण की संभावना अधिक होती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह रोग डायबिटीज, किडनी रोग और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों के लिए जानलेवा हो सकता है।
एम्स रिपोर्ट
एम्स भोपाल की रिपोर्ट के अनुसार पिछले छह सालों में प्रदेश के 20 से अधिक जिलों से 130 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इस बीमारी की मृत्यु दर लगभग 40% बताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मेलियोइडोसिस अब प्रदेश में एंडेमिक रूप ले चुका है। बीमारी के लक्षण अक्सर टीबी जैसी समस्याओं के समान होते हैं, जिससे मरीजों को गलत इलाज मिल जाता है और संक्रमण शरीर में फैल जाता है।
नए मामले और प्रशिक्षण
एम्स भोपाल ने 2023 से अब तक 50 से अधिक चिकित्सक और माइक्रोबायोलॉजिस्ट को विशेष प्रशिक्षण दिया है। हाल ही में 14 नए केस भोपाल, इंदौर, सागर और अन्य जिलों से सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पहचान की क्षमता बढ़ने से नए मामलों की संख्या तेजी से सामने आ रही है।
मुख्य लक्षण
- अचानक तेज बुखार और सेप्सिस
- कम्युनिटी-एक्वायर्ड न्यूमोनिया
- त्वचा और मुलायम ऊतक में संक्रमण
- लिवर, प्लीहा, प्रोस्टेट या पैरोटिड ग्रंथि में फोड़े
- हड्डियों और जोड़ों में संक्रमण
- लंबे समय में वजन घटना, खांसी और फेफड़ों में संक्रमण
बचाव के उपाय
- रक्त, पस, थूक, यूरिन या सीएसएफ सैंपल से जांच
- ब्लड एगर या ऐशडाउन मीडियम पर कल्चर टेस्ट
- माइक्रोस्कोप में सुरक्षा-पिन जैसे धब्बे देखे जाते हैं
- पीसीआर टेस्ट से पुष्टि संभव
सावधानी
- खेत या गीली मिट्टी में काम करते समय जूते और दस्ताने पहनें
- खुले घाव को मिट्टी और पानी से बचाएँ
- संदिग्ध लक्षण पर तुरंत जांच करवाएँ
- समय पर डॉक्टर द्वारा बताए गए एंटीबायोटिक कोर्स का पालन करें
प्रशासन की कार्रवाई
सीएम डॉ. मोहन यादव ने स्वास्थ्य और कृषि विभाग को संयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एम्स और स्वास्थ्य विभाग आम जनता और चिकित्सकों से अपील कर रहे हैं कि लंबे समय तक बुखार या टीबी जैसे लक्षण को नजरअंदाज न करें।
