स्मार्ट सिटी सतना में चल रहा सीवर प्रोजेक्ट अब बड़े घोटाले के आरोपों में घिर गया है। स्थानीय नागरिकों और जागरूक संगठनों का कहना है कि इसमें शासकीय धन का खुला दुरुपयोग हो रहा है। शुरुआत में जो प्रोजेक्ट तैयार किया गया था, उसमें सीवर लाइन बिछाने के साथ रेस्टोरेशन (सड़क को पहले जैसी स्थिति में लाना) का काम भी शामिल था।
नियमानुसार खुदाई करने वाले ठेकेदार को ही रेस्टोरेशन करना था, लेकिन बाद में यह तर्क देकर बदलाव किया गया कि रेस्टोरेशन की सामग्री कम आंकी गई। इसके बाद स्मार्ट सिटी मद से रेस्टोरेशन का अलग ठेका कर दिया गया। यहीं से भ्रष्टाचार का सिलसिला शुरू हुआ।
पहला नुकसान
ठेकेदार ने सीवर लाइन के लिए सड़क के समानांतर खुदाई की और उसका रेस्टोरेशन अलग ठेकेदार को सौंपा गया। काम की गुणवत्ता बेहद खराब रही। कुछ ही दिनों में सड़कें टूटने लगीं, जिससे सरकारी धन का पहला नुकसान सामने आया।
दूसरा नुकसान
जब घटिया रेस्टोरेशन उखड़ गया तो यातायात सुचारु रखने के लिए उसी हिस्से पर फिर से डामर बिछाया गया। इसके लिए अलग से ठेका जारी किया गया। इस प्रक्रिया में सरकारी धन का दूसरा बड़ा नुकसान दर्ज हुआ।
तीसरा नुकसान
सबसे बड़ी गड़बड़ी तब हुई जब सीवर ठेकेदार ने घरेलू कनेक्शन जोड़ने के लिए फिर से सड़क को आड़ा काटना शुरू कर दिया। इस काम से नई बनी सड़क फिर खराब हो गई और अब इसका पुनः रेस्टोरेशन किया जाएगा। यह तीसरा नुकसान सरकारी धन का है।
नियमों की अनदेखी
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमानुसार जब सीवर की मेन लाइन खोदी गई थी, उसी समय हाउस कनेक्शन की व्यवस्था करनी चाहिए थी। उसके बाद एक बार ही रेस्टोरेशन का काम पूरा होता। लेकिन अफसर-ठेकेदार गठजोड़ ने बार-बार ठेके निकालकर तीन गुना फायदा उठाया। सीताराम पेट्रोल पंप से सिंधी कैंप रोड तक की सड़क इस गड़बड़ी का जीवंत उदाहरण है। यहां तीन-तीन बार खुदाई और रेस्टोरेशन ने लोगों को परेशानी में डाल दिया है। वहीं, शहरवासियों का कहना है कि ये सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का गड्ढा है जिसमें करोड़ों रुपये दफन हो रहे हैं।
