MP के नर्सिंग कॉलेज घोटाले में मान्यता को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एनएसयूआई के लगातार विरोध के बाद सरकार ने अचानक 4 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता दे दी, लेकिन इन कॉलेजों में नियमों का पालन नहीं होना सवाल खड़ा कर रहा है।
कौन-कौन से कॉलेज हुए शामिल
- भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी)
- शासकीय कॉलेज ऑफ नर्सिंग, मेडिकल कॉलेज जबलपुर
- शासकीय कॉलेज ऑफ नर्सिंग, ग्वालियर
- शासकीय कॉलेज ऑफ नर्सिंग, जबलपुर
एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि इन कॉलेजों में नियमों का पालन नहीं हो रहा है। खासकर बीएमएचआरसी कॉलेज लंबे समय से बिना प्राचार्य या उप-प्राचार्य के संचालित हो रहा है।
- बीएमएचआरसी कॉलेज में नियमों की कमी
- प्राचार्य और उप-प्राचार्य की नियुक्ति नहीं हुई है।
- उप-प्राचार्य की पदोन्नति नियमों के विपरीत हुई है।
- प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की पद खाली हैं।
- बाकी फैकल्टी आउटसोर्स एजेंसियों पर निर्भर हैं।
- फैकल्टी के अनुभव प्रमाण पत्र में भी गड़बड़ी पाई गई है।
- सीबीआई की रिपोर्ट में भी बीएमएचआरसी कॉलेज को डिफ़िशिएंट कैटेगरी में रखा गया था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि
- पोषण और कौशल प्रयोगशालाएं उपलब्ध नहीं हैं।
- उपकरण और सामग्री की कमी है।
- 8 कक्षाओं के बजाय केवल 4 संचालित हैं।
- जीएनएम प्रोग्राम को बीएससी में अपग्रेड किया गया, लेकिन स्टाफ को अपग्रेड नहीं किया गया।
NSUI का आरोप
रवि परमार ने कहा कि कॉलेज का संचालन आउटसोर्स एजेंसी पर निर्भर है, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार नियमों का पालन नहीं कराती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं करती, तो एनएसयूआई सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी।
जिला अध्यक्ष का बयान
अक्षय तोमर ने कहा कि सरकार ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। ऐसे कॉलेजों को मान्यता देकर न केवल नियमों की अनदेखी की गई है, बल्कि नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता को भी खतरे में डाला गया है।
