मप्र में नर्सिंग शिक्षा की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। एनएसयूआई ने आरोप लगाया है कि प्रदेश के 12 शासकीय नर्सिंग कॉलेज अब तक नर्सिंग काउंसिल की मान्यता से वंचित हैं। शिकायतों और अवलोकनों के बावजूद सरकार ने इन कॉलेजों की कमियों को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने बताया कि इन कॉलेजों में प्राचार्य, उप-प्राचार्य और कई फैकल्टी पद रिक्त हैं। कुछ कॉलेजों में केवल एक या दो फैकल्टी पर पूरा अकादमिक सत्र चल रहा है। साथ ही, फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र, नियुक्तियों में धांधली और नर्सिंग काउंसिल के मानकों की अनदेखी सामने आई है।
अगर सरकार ने हमारी शिकायतों को गंभीरता से लिया होता, तो आज यह स्थिति नहीं बनती। नर्सिंग शिक्षा की यह गिरावट सीधे गरीब छात्राओं के भविष्य को प्रभावित कर रही है। वे निजी कॉलेजों की भारी फीस नहीं भर सकतीं। वहीं, निजी कॉलेजों को फायदा पहुंचाने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग के कुछ अफसरों की सांठ-गांठ दिखाई देती है।
कौन-कौन से कॉलेज?
- रायसेन: प्राचार्य और फैकल्टी रिक्त।
मंत्री – नरेंद्र शिवाजी पटेल (राज्यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा) - मंदसौर: केवल 5 फैकल्टी कार्यरत।
मंत्री – जगदीश देवड़ा (उप मुख्यमंत्री) - नरसिंहपुर: उप-प्राचार्य और फैकल्टी की कमी।
मंत्री – प्रहलाद पटेल, उदय प्रताप सिंह - जबलपुर: प्राचार्य व अधिकांश फैकल्टी पद रिक्त।
मंत्री – राकेश सिंह - राजगढ़: सभी प्रमुख पद रिक्त।
मंत्री – नारायण सिंह पंवार, गोतम टेटवाल - सागर: उप-प्राचार्य और फैकल्टी नहीं, फिर भी M.Sc. नर्सिंग के लिए आवेदन।
मंत्री – गोविंद सिंह राजपूत - खंडवा: प्राचार्य और फैकल्टी रिक्त।
मंत्री – विजय शाह - अमरकंटक: 50 सीटों पर सिर्फ 1 फैकल्टी।
मंत्री – दिलीप जायसवाल - भोपाल: प्राचार्य पद रिक्त, नियुक्तियों में गड़बड़ी।
मंत्री – विश्वास सारंग, कृष्णा गौर - झाबुआ और सीधी: प्राचार्य, उप-प्राचार्य और फैकल्टी सभी पद रिक्त।
जिम्मेदार नेता – निर्मला भूरिया, रीति पाठक - दतिया: बिना अकादमिक संरचना संचालन।
जिम्मेदार नेता – नरोत्तम मिश्रा
इन 12 कॉलेजों में लगभग 1,000 से अधिक सीटें हैं, जो मान्यता न मिलने के कारण खाली रह रही हैं।
एनएसयूआई की मांगें
- सभी शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच।
- फर्जी नियुक्तियों और अनुभव प्रमाण पत्रों पर FIR।
- नर्सिंग शिक्षा बचाने के लिए कड़े और पारदर्शी कदम।
- लापरवाह अधिकारियों का वेतन रोका जाए और जिम्मेदारी तय की जाए।
परमार ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इस गंभीर विषय पर कार्रवाई नहीं की, तो छात्रहितों की रक्षा के लिए प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
