भोपाल के जेपी अस्पताल में शनिवार सुबह एक बड़ा लापरवाही का मामला सामने आया जब ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में सर्जरी शुरू होने से ठीक पहले बिजली चली गई। सर्जरी टेबल पर मरीज को पहले ही एनेस्थीसिया दिया जा चुका था, लेकिन डॉक्टरों को टॉर्च की रोशनी में इलाज करना पड़ा।
सर्जरी स्थगित करने में राहत की बात रही कि उस समय तक मरीज पर चीरा नहीं लगाया गया था। डॉक्टरों ने तुरंत एनेस्थीसिया का असर कम करने की प्रक्रिया अपनाई और सर्जरी को अगले समय के लिए टाल दिया।
डायलिसिस यूनिट भी प्रभावित
सात बजे शुरू हुई डायलिसिस यूनिट में भी बिजली जाने से समस्याएँ उत्पन्न हुईं। मशीनों का बैकअप केवल 25 मिनट तक काम कर सका, जबकि डायलिसिस की पूरी प्रक्रिया में एक घंटे से अधिक समय बाकी था। सुरक्षा कारणों से डायलिसिस रोक दी गई और ब्लड बैंक को अतिरिक्त रक्त यूनिट रखने के निर्देश दिए गए। डायलिसिस यूनिट के इंचार्ज अरमान खान ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस वजह से डायलिसिस बीच में रुकनी पड़ी।
जनरेटर में डीजल न होने का खुलासा
जांच में सामने आया कि जनरेटर में डीजल ही नहीं था। अस्पताल कर्मचारी सुबह 10 बजे बिजली जाने पर जनरेटर चालू करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन वह भी काम नहीं आया। बाद में यह स्पष्ट हुआ कि डीजल डलवाना भूल गया था। सीएमएचओ और सिविल सर्जन डॉ. मनीष शर्मा ने अस्पताल प्रबंधक प्रेमचंद गुप्ता को फटकार लगाई और तुरंत डीजल भरवाकर बिजली बहाल कराई।
भविष्य के लिए सुरक्षा कदम
सीएमएचओ ने बताया कि ट्रांसफॉर्मर में गड़बड़ी के कारण बिजली गई थी और तीन-लेयर कनेक्शन की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही जनरेटर में डीजल का स्तर रोज जांचने के लिए एक कर्मचारी की ड्यूटी तय की जाएगी, जो रिपोर्ट रजिस्टर में दर्ज करेगा।
डीजल चोरी की आशंका
अस्पताल के रिकॉर्ड अनुसार, जनरेटर में आखिरी बार 16 सितंबर को डीजल डलवाया गया था, लेकिन कोई रिकॉर्ड नहीं था कि कितने घंटे यह चला या कितने डीजल की खपत हुई। निगरानी प्रणाली कमजोर होने के कारण डीजल चोरी की संभावना बनी हुई है।
