मैहर जिले के ग्राम झिन्ना में जनआवाज अब सड़कों और धरना स्थल तक पहुंच चुकी है। गांव के सरपंच कोमलचंद चौरसिया अपने साथियों के साथ 8 अक्टूबर से आमरण अनशन पर बैठे हैं। पांच दिन बीत जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम न उठाया जाना लोगों में गहरी नाराजगी पैदा कर रहा है।
ग्राम पंचायत के 15 सूत्रीय मांग पत्र पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है, जबकि इस मुद्दे को लेकर सरपंच और ग्रामीण कई बार अधिकारियों के दरवाजे खटखटा चुके हैं।
दर्जनों आवेदन बेअसर
अनशनकारियों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में सतना और मैहर कलेक्टर को सात बार आवेदन दिए गए, जबकि अनुविभागीय राजस्व अधिकारी अमरपाटन को 13 बार ज्ञापन सौंपा गया। इतना ही नहीं, नायब तहसीलदार को करीब 70 से 80 आवेदन देने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।
“हमने हर दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन जवाब सिर्फ आश्वासन रहा। जब न्याय नहीं मिला, तो हमें अनशन का रास्ता अपनाना पड़ा।”
बिगड़ती सेहत, बढ़ती चिंता
आमरण अनशन को अब पांच दिन हो चुके हैं और अनशनकारियों की सेहत लगातार बिगड़ रही है। तिलकधारी चौरसिया, राजेंद्र कुशवाहा, मिठाई लाल चौरसिया और सुरेश कोल सहित कई ग्रामीणों को चक्कर और कमजोरी की शिकायत होने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो हालात गंभीर हो सकते हैं।
राजनीतिक खींचतान में अटका समाधान
सूत्रों का दावा है कि झिन्ना पंचायत की समस्याओं का समाधान राजनीतिक टकराव में उलझ गया है। प्रशासनिक अधिकारी भी इस मामले में स्पष्ट रुख नहीं ले रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि गांव की आवाज को जानबूझकर अनदेखा कर रहे हैं।
ग्रामीण बोले
गांव के लोगों का कहना है कि यह सिर्फ झिन्ना की नहीं, बल्कि ग्रामीण आवाज को दबाने की प्रवृत्ति के खिलाफ लड़ाई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने अब भी ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को जिला मुख्यालय तक ले जाया जाएगा।
