मुरैना खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने दवा कारोबार में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बुधवार को सख्त कदम उठाया। विभाग ने मुरैना जिले में अतिरिक्त प्रभार के रूप में कार्यरत भिंड की औषधि निरीक्षक आकांक्षा गरुड़ को पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई उनके खिलाफ आई रिपोर्ट के बाद की गई, जिसमें लाइसेंस जारी करने में अनावश्यक देरी और जांच कार्य में लापरवाही की पुष्टि हुई थी।
अतिरिक्त जिम्मेदारी
जानकारी के अनुसार, आकांक्षा गरुड़ को मुरैना जिले में औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी (विक्रय) के रूप में अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी। उनके कार्यकाल के दौरान कई औषधि विक्रेताओं ने लाइसेंस प्रक्रिया में हो रही देरी की शिकायत की थी। शिकायतों की जांच के बाद उपसंचालक की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि विक्रय लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को जानबूझकर लंबित रखा गया, जिससे जिले में दवा व्यापार प्रभावित हुआ।
लापरवाही
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कफ सिरप की जांच प्रक्रिया में आकांक्षा गरुड़ द्वारा गंभीर लापरवाही की गई थी। दवा सैंपल की समय पर जांच और रिपोर्टिंग में विलंब से न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित हुई, बल्कि बाजार में औषधियों की गुणवत्ता को लेकर भी संदेह की स्थिति बनी रही।
इस पर एफडीए नियंत्रक दिनेश श्रीवास्तव ने तत्काल संज्ञान लेते हुए आकांक्षा गरुड़ का मुरैना जिले का अतिरिक्त प्रभार समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए। साथ ही, उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। श्रीवास्तव ने कहा कि शासन की नीति स्पष्ट है दवा नियंत्रण प्रणाली में किसी भी प्रकार की लापरवाही, देरी या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों को सख्त चेतावनी
उन्होंने सभी औषधि निरीक्षकों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि वे अपने दायित्वों का पालन पूरी सतर्कता और निष्पक्षता के साथ करें। एफडीए ने यह भी स्पष्ट किया कि दवा लाइसेंस में देरी सीधे मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण को प्रभावित करती है।
विभाग ने कहा कि औषधि निरीक्षण तंत्र का उद्देश्य केवल दवा कारोबार की निगरानी नहीं, बल्कि जनता तक सुरक्षित और मानक गुणवत्ता की औषधियां पहुंचाना है। भविष्य में यदि किसी अधिकारी द्वारा ऐसी लापरवाही दोहराई गई तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
