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इंदौर में रिटायर्ड आबकारी अधिकारी का खुला खज़ाना, करोड़ों की संपत्ति बरामद

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Published On: 17 October 2025

इंदौर शहर में एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें रिटायर्ड आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया की करोड़ों की संपत्ति उजागर हुई है। 1987 से 2025 तक आबकारी विभाग में काम करने वाले धर्मेंद्र सिंह की कुल सैलरी करीब 2 करोड़ रुपये थी, लेकिन जांच में उनके पास 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति मिलने का खुलासा हुआ।

जाxच में पता चला कि उनके घर और प्लॉट्स में 4 किलो सोना, 7 किलो चांदी, करीब 2 करोड़ नकद और 5 करोड़ रुपये कीमत के प्लॉट पाए गए हैं। इसके अलावा धर्मेंद्र भदौरिया एक महंगी टाउनशिप में आलीशान बंगला भी बनवा रहे थे, जो इटालियन डिजाइन में तैयार हो रहा था। पूरा घर बेहद शानदार और आधुनिक डिजाइन के अनुसार सजाया जा रहा था।

रकम असाधारण

अधिकारियों का कहना है कि इतनी संपत्ति देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनकी कमाई के हिसाब से यह रकम असाधारण है। इस मामले ने शहर और विभाग में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस और आयकर विभाग की टीम ने घर और संपत्तियों की तलाशी ली और सभी की लिस्ट तैयार की है।

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि धर्मेंद्र भदौरिया के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अब इस संपत्ति की जांच होगी कि यह सभी संपत्ति उनकी वैध आमदनी से खरीदी गई है या किसी अन्य स्रोत से। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बना चर्चा का विषय

यह मामला इंदौर और आसपास के इलाकों में चर्चा का विषय बन गया है। लोग हैरान हैं कि एक सरकारी अधिकारी ने अपनी वैध आय के मुकाबले इतनी बड़ी संपत्ति जमा की। कई लोग इसे विभाग और प्रशासनिक निगरानी की कमजोरी भी बता रहे हैं। धर्मेंद्र भदौरिया के घर से मिली संपत्ति में नकद, सोना-चांदी और बहुमूल्य गहनों के अलावा कई दस्तावेज और रिकॉर्ड भी मिले हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि संपत्ति की पूरी तस्वीर सामने आ सके।

जांच जारी

इस खुलासे के बाद प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा अवैध संपत्ति जमा करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों के अनुसार, कार्रवाई करने और आम जनता में प्रशासन की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अब इस मामले को पूरी तरह से जांच के दायरे में रखा जाएगा।

इंदौर में यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि विभाग में लंबे समय तक सेवा देने वाले अधिकारी भी कानून और निगरानी की सीमाओं को चुनौती दे सकते हैं।

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