राजधानी भोपाल में को रैबीज मुक्त शहर बनाने के लिए अब प्रशासन ने कमर कस ली है। शुक्रवार को संभागायुक्त संजीव सिंह ने अफसरों की बैठक में साफ कहा कि भोपाल में एन्टी-रैबीज प्रोग्राम को सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि शहर में पशुपालन विभाग अभियान को प्राथमिकता से चलाए और आवारा कुत्तों के टीकाकरण से लेकर जनजागरूकता तक ठोस कदम उठाए।
कमिश्नर कार्यालय में हुई समय-सीमा समीक्षा बैठक के दौरान श्री सिंह ने कहा कि हमारा लक्ष्य भोपाल को रैबीज फ्री सिटी बनाना है, इसलिए अब हर विभाग को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने बताया कि हर वार्ड और कॉलोनी में टीकाकरण की निगरानी की जाए और उसकी साप्ताहिक रिपोर्ट तैयार हो।
अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में संयुक्त आयुक्त (विकास) डॉ. विनोद यादव, उपायुक्त (राजस्व) किरण गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान संभागायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग की सुमन हेल्प डेस्क की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की मौत के मामलों को कम करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस दौरान उन्होंने गैर-संचारी रोगों की जांच और स्कूलों में चल रहे नेत्र परीक्षण व चश्मा वितरण कार्यक्रम की भी जानकारी ली।
लापरवाही बर्दाश्त
संभागायुक्त ने कहा कि अब सफाई व्यवस्था को लेकर कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सड़कें, नालियां, सीवेज और गलियां साफ हों, यह प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिए कि सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली पुरानी शिकायतों का जल्द से जल्द निराकरण किया जाए, खासकर वे शिकायतें जो 100 दिनों से अधिक लंबित हैं।
धरातल पर दिखें
संभागायुक्त ने समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम के तहत लंबित प्रकरणों को भी प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र हितग्राही तक पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जाए। अंत में उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी है कि योजनाएं कागजों से निकलकर धरातल पर दिखें। सफाई, स्वास्थ्य और पशुपालन इन तीनों मोर्चों पर अगर ईमानदारी से काम हुआ तो भोपाल को रैबीज फ्री बनाना मुश्किल नहीं होगा।
