मैहर के नादन क्षेत्र में खदान, क्रेशर और डामर प्लांट लगातार खुला प्रदूषण फैलाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां चल रहे कई प्लांट मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के तय मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। विशेषकर दक्षिणा इफ्रो डामर प्लांट की लापरवाही से हवा में धूल और आसपास के जल स्रोतों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति तक पहुंच चुका है।
जनता त्रस्त
स्थानीय लोग दिनों-दिन असहज महसूस कर रहे हैं। बच्चे स्कूल में खांस रहे हैं, बूढ़े सांस लेने में दिक्कत झेल रहे हैं और खेतों की मिट्टी भी प्रदूषित हो रही है। बावजूद इसके, क्षेत्रीय अधिकारी और कनिष्ठ वैज्ञानिक मूकदर्शक बने हुए हैं। स्थानीयों का आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही और व्यापारी वर्ग का संरक्षण, प्रदूषण फैलाने वालों को बेखौफ कर रहा है।
प्रदूषण का स्तर
मैहर नादन के कई डामर प्लांट और क्रेशर से निकलने वाली धूल, कंक्रीट और रसायन आसपास के गांवों तक पहुँच रहे हैं। हवा, पानी और मिट्टी तीनों ही प्रभावित हैं। स्थानीय निवासी ने बताया, “सफेदपोश व्यापारी हर नियम की अवहेलना कर रहे हैं। विभाग सिर्फ नोटिस पर नोटिस जारी करता है, कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता। हमारे गांव का जीवन प्रभावित हो रहा है।”
कौन जिम्मेदार, किसकी जवाबदेही?
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानक और दिशा-निर्देश तो साफ हैं, लेकिन उनका पालन कराने वाला प्रशासन अब तक सख्ती नहीं दिखा पाया। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि अधिकारी और विभाग सख्त कार्रवाई करें, प्लांट मालिकों को चेतावनी दें और प्रदूषण स्तर कम करने के लिए नियमित जांच शुरू करें।
