सतना जिले में कोयले का काला खेल खुलेआम चल रहा है और खनिज विभाग पूरी तरह मौन है। शहर से लगे माधवगढ़ और मटेहना इलाके में ईसू गुप्ता का बड़ा यार्ड बना हुआ है, जहां रोज़ाना ट्रकों में कोयला डंप होता है। जानकारी के मुताबिक, इस गोरखधंधे में दीक्षित रोड कैरियर के मालिक पंकज दीक्षित की भी सीधी भूमिका है। दोनों की जुगलबंदी में कोयले की तस्करी रातों-रात यूपी तक हो रही है।
रात में होता धंधा
सूत्रों के अनुसार, देर रात 1 बजे टीपी (ट्रांसपोर्ट पास) जारी होती है, और 2 बजे तक ट्रक सिंहपुर से निकलकर यूपी की सीमा पार कर जाते हैं। खेल यहीं नहीं रुकता एक टीपी में दो-दो ट्रिप निकाल दी जाती हैं। यानी एक ही कागज पर दो बार कोयला भेजा जाता है। इसी के साथ, ट्रक ओवरलोड भी चल रहे हैं। मतलब सरकार की रॉयल्टी का नुकसान और अफसरों की आंखों में धूल।
यूपी के कई जिलों तक पहुंचता है ‘काला सोना’
बताया जा रहा है कि माधवगढ़ से निकला कोयला राजापुर, खागा, धाता और कौशांबी (उत्तरप्रदेश) तक जा रहा है। मझगवां इलाके के भैयालाल यादव, बेनी मिश्रा और बबुआ यादव जैसे मोटर मालिक भी इस धंधे में शामिल बताए जा रहे हैं। इनके पास कुल 6 ट्रक हैं, जिनसे रोज़ाना कोयला ढोया जा रहा है। लोगों का कहना है कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड ईसू गुप्ता और पंकज दीक्षित ही हैं। दोनों ने खनिज विभाग और पुलिस की मिलीभगत से ऐसा नेटवर्क तैयार किया है कि कोई कार्रवाई की भनक तक नहीं लगती। रात के अंधेरे में ट्रक निकल जाते हैं, और सुबह तक सब कुछ सामान्य दिखता है।
खनिज विभाग की चुप्पी
अब सवाल यह उठता है कि जब यह कारोबार सड़क से लेकर गांव तक सबको दिख रहा है, तो खनिज विभाग को क्यों नहीं दिखता? क्या विभाग खुद आंखें मूंदे हुए है या किसी दबाव में काम कर रहा है? सूत्रों की मानें तो इस खेल में मझगवां और बरौंधा पुलिस की ‘सक्रियता’ भी संदिग्ध मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि विभाग कब जागता है और सतना से निकल रहे “काले सोने” की तस्करी पर लगाम लगाता है या नहीं।
