,

जबलपुर में अंजुमन इस्लामिया स्कूलों के विवाद के बाद भाजपा नेता को जान से मारने की धमकी, शिकायत के बाद भड़का विवाद

Author Picture
Published On: 3 November 2025

जबलपुर में अंजुमन इस्लामिया वक्फ बोर्ड के स्कूलों में जुम्मे की छुट्टी और रविवार को स्कूल लगाने के आदेश पर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा। इस मामले में शिकायत करने वाले भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के महामंत्री मुजम्मिल अली को अब जान से मारने की धमकी मिली है। मुजम्मिल अली का कहना है कि गोहलपुर निवासी इसरार अंसारी ने पहले सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डाली और बाद में उन्हें फोन कर धमकाया। उन्होंने ओमती थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अंजुमन इस्लामिया वक्फ बोर्ड के जबलपुर में चार स्कूल हैं। हाल ही में बोर्ड ने एक आदेश जारी किया था कि अब स्कूलों में शुक्रवार की छुट्टी होगी और रविवार को स्कूल खुले रहेंगे। भाजपा नेता मुजम्मिल अली ने इस फैसले को “तालिबानी फरमान” बताया और कलेक्टर राघवेंद्र सिंह को लिखित शिकायत दी।

उन्होंने कहा कि यह स्कूल 117 साल पुराना है और अब तक रविवार को ही छुट्टी होती आई है। शिकायत के बाद कलेक्टर के निर्देश पर डिप्टी कलेक्टर आर.एस. मरावी और जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्कूल का ताला तुड़वाकर उसे खुलवाया और साफ कहा कि बाकी स्कूलों की तरह ही छुट्टी का शेड्यूल तय किया जाए।

वॉट्सऐप पर भड़की आग

रविवार रात ‘अंसारी बुनकर’ नामक वॉट्सऐप ग्रुप में भाजपा नेता की शिकायत से जुड़ी एक पोस्ट वायरल हुई। पोस्ट में लिखा गया, “क्या ये देश सिर्फ रविवार की छुट्टियों से चलेगा? क्या शुक्रवार को आराम करे तो देशद्रोही हो जाएगा?” इस पोस्ट के बाद माहौल और गरम हो गया। मुजम्मिल अली के मुताबिक, इसरार अंसारी ने उन्हें फोन कर “भाजपा का दलाल”, “कोम का गद्दार” जैसे शब्दों से गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी।

पुलिस की जांच जारी

ओमती थाना प्रभारी राजपाल सिंह बघेल ने बताया कि भाजपा नेता ने लिखित शिकायत दी है। पुलिस ने आवेदन लेकर धमकी देने वाले की पहचान और फोन रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। मुजम्मिल अली का कहना है कि प्रशासन ने केवल मालवीय चौक वाले स्कूल पर कार्रवाई की है, जबकि अंजुमन बोर्ड के बाकी स्कूलों में भी शुक्रवार की छुट्टी लागू है। उन्होंने मांग की है कि सभी स्कूलों की जांच की जाए और एक समान नियम लागू किया जाए। इस पूरे मामले ने शहर के शिक्षा और धर्म से जुड़ी राजनीति को फिर गर्मा दिया है। अब सबकी नजर पुलिस की जांच और वक्फ बोर्ड के अगले कदम पर है।

Related News
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp